विपक्ष के विरोध में सड़क पर उतरेंगे उपेंद्र कुशवाहा, कहा 'ऐतिहासिक कदम को विपक्ष ने रोक दिया'

पटना: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने राजधानी पटना में प्रेस वार्ता किया। इस दौरान उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक, ओबीसी प्रतिनिधित्व और परिसीमन पर अपनी बात रखी। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रही थी, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया। उनका आरोप था कि विपक्ष ओबीसी महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलने का मुद्दा उठाकर विपक्ष बिल को पास होने से रोक रहा है।

उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में एससी-एसटी वर्ग के लिए संविधान में आरक्षण की व्यवस्था है, लेकिन ओबीसी वर्ग के लिए इस तरह का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक जातीय जनगणना की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण लागू करना संभव नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना देश की लंबे समय से चली आ रही मांग है और सरकार इसे लागू करने की दिशा में काम कर रही थी, लेकिन विपक्ष ने इसमें बाधा डाली, जो महिलाओं के साथ बड़ा अन्याय है।

परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पिछले 50 वर्षों से लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रही है। उन्होंने बताया कि 1976 में आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार द्वारा परिसीमन की प्रक्रिया रोक दी गई थी, जिसका असर आज तक देखने को मिल रहा है। कुशवाहा ने दावा किया कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होता, तो बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो सकती थी और विधानसभा सीटें 243 से बढ़कर 365 हो जातीं। इससे अधिक लोगों—खासकर महिलाओं—को राजनीति में प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा इस मुद्दे को लेकर लगातार अभियान चला रही है और आगे भी आंदोलन जारी रहेगा। 22 तारीख को पार्टी द्वारा विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की बात भी उन्होंने कही।

  

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