पूरा कर लिया जादुई आंकड़ा फिर भी राज्यसभा सीट हार गए तेजस्वी, आखिर कैसे हुई वोटों की गिनती...
- by Pratyek Media
- 17-Mar-2026
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पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर सोमवार को मतदान और मतगणना में एक तरफ NDA ने क्लीन स्वीप किया तो विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के सारे दावे धरे के धरे रह गए। हालांकि तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के विधायकों के साथ ही आवश्यक 6 वोट की व्यवस्था कर ली थी बावजूद इसके उन्हें हार का सामना करना पड़ा जिसके बाद बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गया। राज्यसभा चुनाव में पहली वरीयता की गिनती में NDA की तरफ से CM नीतीश, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने जीत दर्ज कर ली तो दूसरी वरीयता की गिनती में भाजपा के शिवेश कुमार भी जीत गए। बता दें कि पहली वरीयता की गिनती में भाजपा के शिवेश कुमार को महज 30 वोट ही प्राप्त हुए थे जबकि राजद के अमरेंद्रधारी सिंह को 37 वोट फिर भी जीत NDA के खाते में चली गई।
जादुई आंकड़ा पूरा किया तो अपने ही दगा दे गए
राज्यसभा चुनाव में विधायकों की संख्या के अनुसार एक सीट पर जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत थी और इस हिसाब से NDA 4 सीट पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती थी जबकि एक सीट के लिए NDA को तीन वोट कम पड़ रहे थे वहीं महागठबंधन को 6 वोटो की कमी थी। इस एक सीट पर जीत के लिए क्रॉसवोटिंग की बात सामने आ रही थी। हालांकि दोनों गठबंधन के नेताओं ने अपने विधायकों पर भरोसा रखा। 6 वोटो की कमी पूरा करने के लिए तेजसी ने ओवैसी की पार्टी AIMIM के 5 तथा मायावती की पार्टी बसपा के 1 विधायक का समर्थन लेकर जादुई आंकड़ा पूरा करने की कोशिश तो की लेकिन अंतिम समय में उनके चार विधायकों ने धोखा दे दिया।
अधिक वोट मिलने के बावजूद हारे
मतदान के दौरान कांग्रेस के 3 और राजद के एक विधायक वोट डालने ही नहीं पहुंचे जिसकी वजह से महागठबंधन उम्मीदवार को 37 वोट प्राप्त हुए। उधर NDA में पहले चार उम्मीदवारों में से दो को 44- 44 तथा दो को 42-42 वोट प्राप्त हुए जबकि पांचवें उम्मीदवार को मात्र 30 वोट ही मिले। दोनों उम्मीदवार को विजयी वोट नहीं मिलने की स्थिति में दूसरी वरीयता की गिनती की गई जिसमें NDA प्रत्याशी ने जीत दर्ज कर ली।
अंतिम सांस तक लड़ेंगे तेजस्वी
राज्यसभा चुनाव में सभी पांच सीटों पर जीत के बाद NDA नेताओं ने विकास की राजनीति और लोकतंत्र की जीत बताई तो दूसरी तरफ राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने अंतिम सांस तक भाजपा के साथ लड़ाई लड़ने की बात कही। चुनाव परिणाम के बाद मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि हम सबने जीत के लिए आवश्यक वोटों के लिए ओवैसी और मायावती की पार्टी का समर्थन हासिल कर लिया लेकिन भाजपा ने अपने चाल चरित्र का परिचय दे कर जीत हासिल कर लीं। तेजस्वी ने कहा कि हमारे पास 6 वोटो की कमी थी बावजूद इसके हमने लड़ना पसंद किया न कि झुकना। हम भाजपा के विचारधारा से लड़ रहे हैं और अपने अंतिम सांस तक लड़ेंगे। महागठबंधन के विधायकों के वोटिंग के लिए नहीं पहुंचने पर तेजस्वी ने कहा कि उनके साथ क्या करना है इस मामले में हम बाद में बात करेंगे लेकिन अभी जो हुआ वह गलत राजनीति की जीत है।
कैसे होती है वोटों की गिनती?
राज्यसभा चुनाव में सभी मतदाता विधायक एक उम्मीदवार को वोट डालते हैं साथ ही वे अपने तरफ से दूसरे उम्मीदवार के चयन की भी जानकारी देते हैं। राज्यसभा चुनाव में मतदाताओं के पहली प्राथमिकता को प्रथम वरीयता की गिनती में गिना जाता है और उसी से उम्मीदवार की जीत हार तय होती है। लेकिन अगर किसी सूरत में पक्ष और विपक्ष के उम्मीदवार जीत के लिए निर्धारित वोट प्राप्त नहीं करते हैं तब फिर द्वितीय वरीयता की गिनती की जाती है। इसमें सभी मतदाताओं के दुसरे ऑप्शन को गिना जाता है और इसके आधार पर प्राप्त वोट की संख्या से जीत हार तय होती है। इस बार मतगणना में NDA उम्मीदवार को मात्र 30 वोट मिले थे जबकि राजद के उम्मीदवार को 37 वोट। इसके अनुसार एक उम्मीदवार निर्धारित आंकड़े से 11 वोट दूर थे थे दूसरे उम्मीदवार मात्र 4 वोट दूर लेकिन जब दूसरी वरीयता की गिनती की गई तो NDA के उम्मीदवार को अधिक वोट मिले जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार को वही पहले वाला आंकड़ा ही प्राप्त हुआ और इसके आधार पर भाजपा के शिवेश कुमार विजयी हो गए।


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