दीपक प्रकाश के मंत्रीपद पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा तीखा सवाल, 'जब सदन के सदस्य नहीं तो...'
- by Manjesh Kumar
- 30-Jul-2026
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नई दिल्ली: किसी भी सदन के सदस्य बने बगैर पिछले नवंबर महीने से बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। इस मामले में गुरुवार को एक अहम सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल किया है। कोर्ट ने बिहार सरकार से सीधा सवाल किग है कि जब वह किसी सदन के सदस्य नहीं बने हैं तो फिर इस पद पर कैसे बने हुए हैं। इस पूरे मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से संविधान और कानून से जुड़ा सवाल है। राज्य सरकार को यह बताना होगा कि बिना चुने गए कोई व्यक्ति 6 महीने की तय सीमा के बाद भी मंत्री पद पर कैसे रह सकता है। सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होनी है और अदालत का जो भी आदेश होगा, उसका पूरा पालन किया जाएगा.m। दीपक प्रकाश को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री बनाया गया था। उस समय वे न तो विधायक थे और न ही उन्होंने चुनाव लड़ा था। रालोमो के 4 विधायक होने के बावजूद उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बनवाया था। बाद में जब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने, तब भी दीपक प्रकाश को इसी विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी गई इस तरह दो बार मंत्री पद की शपथ लेने के बावजूद वे बिहार विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं बन सके।
संविधान के नियमों के मुताबिक, किसी भी गैर-विधायक व्यक्ति को मंत्री बनने के 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है. दीपक प्रकाश के मामले में यह समय सीमा पार हो चुकी है। 27 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके राजनीतिक भविष्य और मंत्री पद का फैसला तय करेगा।


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