बिहार में कब होगा पंचायत और नगर निकाय सीएम सम्राट ने बताया, कहा 'गांव की समृद्धि देश की समृद्धि'

पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को पटना के ताज सिटी सेंटर में आयोजित 'ग्राम संसद-बिहार चैप्टर-v' मुखिया संवाद कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, पंचायतों की भूमिका तथा गांवों को आत्मनिर्भर एवं विकसित बनाने के विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों का महत्वपूर्ण योगदान है। ग्राम संसद के माध्यम से गांवों के विकास के लिए ठोस सुझाव सामने आने चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2037 में बिहार की स्थापना के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर तक बिहार को समृद्ध, सशक्त और विकसित बनाने के लिए अभी से योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। पंचायत के मुखिया के पास अपने क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं के समाधान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। जनता द्वारा दिए गए कर से ही शासन-व्यवस्था संचालित होती है और जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने पंचायत स्तर पर राजस्व के नए स्रोत विकसित करने के लिए ग्राम संसद से सुझाव देने का आह्वान किया, ताकि गांवों में कचरा प्रबंधन, पेयजल, बिजली, सड़क सहित बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार आम लोगों पर अतिरिक्त कर लगाने के पक्ष में नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगला पंचायत चुनाव परिसीमन के बाद ही कराया जाएगा। अगले वर्ष नगर निकायों में भी परिसीमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पंचायत और नगर निकाय क्षेत्र का स्पष्ट निर्धारण हो सके। उन्होंने कहा कि लगभग 7,500 की आबादी पर एक पंचायत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। पंचायतों में विकास कार्यों के क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पंचायती राज विभाग में इंजीनियरिंग सेल विकसित किया जाएगा। इससे मुखिया को पंचायत क्षेत्र में योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी सहायता मिलेगी और गांवों की विकास व्यवस्था को और बेहतर किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 'सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान' की शुरुआत की गई है। इसके तहत प्रत्येक पंचायत में 10 विकास योजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिसमें स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी केंद्र आदि के रख-रखाव, रंगाई-पुताई और आधारभूत सुविधाओं को निर्धारित समय सीमा में बेहतर बनाने का कार्य शामिल है। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सहयोग शिविर की शुरुआत की गई है। प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर आयोजित किया जा रहा है। सहयोग शिविर में प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के अंदर निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। निष्पादन से असंतुष्ट आवेदकों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री के स्तर पर भी राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को ग्राम सभा की बैठक आयोजित करने की व्यवस्था शुरू की गई है। इस प्रकार वर्ष में कम से कम 12 बार ग्राम सभा की बैठक कर गांव के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा और निर्णय किए जा रहे हैं। पंचायत सरकार भवनों के निर्माण के साथ-साथ उनके रख-रखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण है। पंचायतों के जनप्रतिनिधियों के बीच विकास को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना होनी चाहिए, ताकि उनके क्षेत्र में सड़क, जल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो।  मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बड़ी राशि करीब 18 हजार करोड़ रूपये राज्य से बाहर जाती है। इसे देखते हुए बिहार में उच्च शिक्षा के संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है। राज्य में नए निजी विश्वविद्यालय और सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं तथा अधिक से अधिक निजी विश्वविद्यालय खोलने का लक्ष्य है, ताकि बिहार के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने राज्य में ही उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 से पहले एक करोड लोगों को सरकारी नौकरी एवं रोजगार उपलब्ध कराना है। अगले चार-पांच वर्षों में ऐसी परिस्थितियां बनाने का प्रयास किया जाएगा कि बिहार के लोगों को मजबूरी में रोजगार के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़े। उन्होंने त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों की व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा तकनीक का उपयोग कर बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के संबंध में सुझाव देने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को कृषि कार्य के लिए 55 पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिस पर प्रति वर्ष 5 हजार करोड़ रूपये खर्च हो रहे हैं। सभी कृषि फीडरों को सोलराइज करने की दिशा में काम किया जा रहा है। बिहार में प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में बने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योग के उत्पादों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जाएगी। छड़, सीमेंट सहित बिहार में निर्मित उत्पादों की खरीद कम से कम 30 प्रतिशत करना होगा जिसे टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ग्राम संसद की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत और वर्ष 2037 तक समृद्ध एवं सशक्त बिहार के निर्माण के लिए सभी त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि अपना सुझाव एवं सहयोग दें, ताकि उन्हें नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में शामिल किया जा सके। गांव की समृद्धि देश की समृद्धि है। गांव विकसित होगा, तभी देश विकसित होगा।

कार्यक्रम को उच्च शिक्षा सह विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर, विधान पार्षद एवं ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख, ग्राम संसद के उपाध्यक्ष दीपक ठाकुर एवं ग्राम संसद के नेशनल ब्रांड एम्बेस्डर किरण प्रभाकर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में बिहार राज्य मुखिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश राय, बिहार राज्य पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद निराला, ग्राम संसद के संस्थापक एवं महासचिव ब्रजेश शर्मा, ग्राम संसद के महासचिव मृत्युंजय सिंह, ग्राम संसद की नेशनल ब्रांड एम्बेसडर किरण प्रभाकर सहित बड़ी संख्या में मुखिया एवं सरपंच उपस्थित थे।

  

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