दरभंगा स्नातक सीट पर बड़ा उलटफेर, दूसरी वरीयता के वोटों ने पलटा खेल, RJD के अनिल झा जीते

दरभंगा: बिहार विधान परिषद की दरभंगा स्नातक निर्वाचन सीट पर मतगणना के तीसरे दिन बड़ा चुनावी उलटफेर देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और मौजूदा एमएलसी सर्वेश कुमार को हार का सामना करना पड़ा, जबकि राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी अनिल कुमार झा ने 450 मतों के अंतर से जीत हासिल कर ली। इस मुकाबले में सबसे अहम भूमिका दूसरी वरीयता के मतों ने निभाई, जिनकी गिनती और हस्तांतरण के बाद चुनाव का पूरा समीकरण बदल गया।

मतगणना के अधिकांश चरणों में बढ़त बनाए रखने वाले सर्वेश कुमार को अंतिम दौर में शिकस्त मिली। यहां तक कि एलिमिनेशन राउंड के दौरान जब मुकाबला अंतिम तीन प्रत्याशियों के बीच सिमट गया था, तब भी सर्वेश कुमार 1,046 मतों से आगे चल रहे थे। लेकिन जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद इम्तियाज के मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता के वोटों की गणना के बाद अनिल कुमार झा ने बढ़त बना ली और अंततः जीत अपने नाम कर ली।

दूसरी वरीयता के वोटों ने बदल दिया नतीजा

दरभंगा स्नातक सीट की मतगणना में शुरुआत से ही सर्वेश कुमार और अनिल कुमार झा के बीच मुकाबला बना हुआ था। पहली वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने के बाद भी सर्वेश कुमार अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे थे। हालांकि, निर्धारित जीत का कोटा पूरा नहीं होने के कारण मतगणना को वरीयता आधारित एलिमिनेशन प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली इस प्रक्रिया के तहत जब कोई उम्मीदवार आवश्यक मतों का कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो सबसे कम वोट पाने वाले प्रत्याशियों को क्रमशः मुकाबले से बाहर किया जाता है। इसके बाद उनके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता के अनुसार मत शेष उम्मीदवारों के खाते में स्थानांतरित किए जाते हैं।

इसी प्रक्रिया के अंतिम चरण में जन सुराज के मोहम्मद इम्तियाज के मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती हुई। मतों के हस्तांतरण के बाद अनिल कुमार झा ने सर्वेश कुमार को पीछे छोड़ दिया। अंततः 450 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर उन्होंने दरभंगा स्नातक सीट पर राजद का परचम लहरा दिया।

बढ़त के बावजूद सर्वेश कुमार को मिली हार

इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू यही रहा कि लंबे समय तक आगे रहने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार सर्वेश कुमार जीत हासिल नहीं कर सके। पहली वरीयता के मतों से लेकर एलिमिनेशन प्रक्रिया के अंतिम तीन उम्मीदवारों वाले चरण तक उनकी बढ़त बनी हुई थी। लेकिन वरीयता आधारित मतगणना में केवल शुरुआती बढ़त निर्णायक नहीं होती। अन्य उम्मीदवारों के बाहर होने के बाद उनके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयताओं के आधार पर भी अंतिम परिणाम तय होता है। दरभंगा में इसी प्रक्रिया ने चुनावी तस्वीर बदल दी और अनिल कुमार झा विजेता बनकर उभरे।

2020 में निर्दलीय जीतकर विधान परिषद पहुंचे थे सर्वेश कुमार

सर्वेश कुमार का पिछला चुनावी सफर भी काफी दिलचस्प रहा था। वर्ष 2020 के चुनाव में उन्होंने भाजपा से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया था। उस चुनाव में उन्होंने जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी दिलीप चौधरी को हराकर पहली बार बिहार विधान परिषद में प्रवेश किया था। इस बार सर्वेश कुमार भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे। लंबे समय तक बढ़त बनाए रखने के बावजूद दूसरी वरीयता के मतों की गणना के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

दरभंगा स्नातक सीट के नतीजे ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

दरभंगा स्नातक सीट पर अनिल कुमार झा की जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वरीयता आधारित चुनावों में अंतिम परिणाम का आकलन केवल पहली वरीयता के मतों से नहीं किया जा सकता। मतों के हस्तांतरण के बाद उम्मीदवारों की स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। सर्वेश कुमार की शुरुआती बढ़त और अंतिम चरण में मिली हार इस चुनाव का सबसे चर्चित पहलू बन गई है। वहीं, 450 मतों से जीत हासिल करने वाले अनिल कुमार झा के लिए यह परिणाम दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता है।

  

Related Articles

Post a comment