आरक्षण के मुद्दे पर बिहार में सियासी तकरार, एक तरफ आपस में भिड़े एनडीए के दो केंद्रीय मंत्री तो तेजस्वी ने भी किया जोरदार हमला
- by Manjesh Kumar
- 30-Aug-2026
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पटना: इन दिनों बिहार में आरक्षण का मुद्दा बड़ा सियासी मुद्दा बना हुआ है। मामले में एक तरफ जहां एनडीए के दो नेता आपस में वार पलटवार कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अब बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने भी जोरदार वार किया है। तेजस्वी यादव ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान समेत भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। तेजस्वी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अभी तक कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ है, जो आरक्षण को खत्म कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण के मुद्दे पर बोलने वाले नेताओं को नागपुर से संदेश आता है कि एक पक्ष में बोलना है या विपक्ष में। तेजस्वी यादव ने कहा आज तक मैंने आरक्षण का न तो इस्तेमाल किया और न ही फायदा उठाया है जबकि चिराग और मांझी हमेशा सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ते हैं। अगर वे लोग आरक्षण खत्म करने वाले लोगों के साथ खड़े हैं तो फिर वे अपने पद से इस्तीफा दे दें और फिर सामान्य सीट से चुनाव लड़ें।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि आरक्षण का फायदा लेकर मंत्री बनने वाले नेता ही अब आरक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने चिराग और मांझी पर अपने समाज के हित से ज्यादा पद और कुर्सी को महत्व देने का आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने आरक्षण को लेकर 2015 के विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की बात कही। तेजस्वी के मुताबिक, उस समय बिहार की जनता ने बीजेपी को इसका जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस लंबे समय से आरक्षण को खत्म करने की साजिश कर रहे हैं। आरक्षण के मुद्दे पर चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और संतोष सुमन के बीच चल रही बयानबाजी को तेजस्वी यादव ने बीजेपी की रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी पीछे से यह पूरा ड्रामा करवा रही है। पार्टी लोगों का मिजाज नापने की कोशिश कर रही है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि एनडीए के दोनों नेता समाज के बजाय पद और कुर्सी के फायदे के लिए राजनीति कर रहे हैं।
बता दें कि आरक्षण में कोटे के अंदर कोटा और क्रीमी लेयर के मुद्दे पर विवाद शुरू हुआ है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और संतोष सुमन से मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की थी। इसके जवाब में संतोष सुमन ने चिराग को अपना छोटा भाई बताया। उन्होंने कहा कि अगर इस्तीफे की बात हो रही है तो इसकी शुरुआत चिराग पासवान को करनी चाहिए। संतोष सुमन ने कहा कि चिराग के पास बड़ी पार्टी और ज्यादा संख्या बल है। राजनीतिक परिवार की तीसरी पीढ़ी भी आगे है, इसलिए पहले चिराग इस्तीफा दें। अगर वह इस्तीफा देते हैं तो वह भी उनके साथ इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। संतोष सुमन ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा कि उन्होंने कहीं भी SC-ST आरक्षण खत्म करने की बात नहीं कही। उन्होंने क्रीमी लेयर के आधार पर किसी को आरक्षण से बाहर करने की बात से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि क्रीमी लेयर और कोटे के अंदर कोटा यानी सब-कोटा अलग-अलग मुद्दे हैं। दोनों को एक साथ जोड़कर भ्रम पैदा करना ठीक नहीं है। संतोष सुमन के मुताबिक, वह SC-ST के भीतर अलग-अलग जातियों की स्थिति को देखते हुए वर्गीकरण और कोटे के अंदर कोटा की बात कर रहे हैं।
विवाद में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी चिराग पासवान पर पलटवार कर चुके हैं। मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी न तो आरक्षण खत्म करने की बात कर रही है और न ही आरक्षण हटाने की। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान उनके बेटे संतोष सुमन की बात को ठीक से समझ नहीं रहे हैं। मांझी ने भी चिराग की इस्तीफे वाली मांग पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर चिराग इस्तीफा मांग रहे हैं तो पहले उन्हें खुद इस्तीफा देना चाहिए।


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