पूर्णिया में क्राइम कंट्रोल के लिए थानेदारों को बदलना जरूरी, माफियाओं पर नहीं कस पा रहे हैं शिकंजा

पूर्णिया: बिहार में गृह विभाग और मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालने के बाद से सम्राट चौधरी लगातार अपराध नियंत्रण को लेकर सक्रिय हैं। कुछ समय के अंतराल पर वह अपराधियों को खुले मंच से चेतावनी भी देते दिखते हैं। अपनी चेतावनी में सम्राट चौधरी अपराधियों को अपराध या फिर बिहार छोड़ने के लिए कहते हैं या फिर पुलिस की कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहने की भी बात करते हैं। सम्राट सरकार के गठन के बाद राज्य में कई मुठभेड़ भी हुए जिसमें अपराधी या तो जख्मी हुए या ढेर किए गए। इसी कड़ी में सरकार ने कई जिलों के एसपी का भी तबादला किया वहीं पूर्णिया में पहली बार एसएसपी को भी पदस्थापित किया। पूर्णिया एसएसपी का पद संभालते ही डॉ शौर्य सुमन लगातार सक्रिय हैं और महज एक सप्ताह के कार्यकाल में ही कई थानों का औचक निरीक्षण भी कर चुके हैं। एसएसपी की कार्यशैली और सक्रियता से लोगों में क्राइम कंट्रोल को लेकर एक उम्मीद जगी है।

थानेदारों पर लग रहे सांठगांठ के आरोप

नवपदस्थापित एसएसपी डॉक्टर शौर्य सुमन ने पिछले एक सप्ताह में अपनी मजबूत उपस्थिति जरूर दर्ज कराई है। थानों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं, कमियां पाई जाने पर अधिकारियों को फटकार भी लगा रहे हैं लेकिन जब तक जमे हुए अधिकारी और कर्मियों को नहीं हिलाया जाएगा तब तक पूर्णिया में क्राइम कंट्रोल एक बड़ी चुनौती होगी। लोगों का कहना है कि पुलिस अगर अपनी पूरी ताकत से कार्रवाई करे तो नशे का कारोबार हो या अन्य आपराधिक घटनाएं, लगाम लगाई जा सकती है लेकिन एक ही थाने में लंबे समय से जमे अधिकारी हमेशा कार्रवाई में ढिलाई करते हैं। जैसा कि पिछली कई बड़ी घटनाओं को देखने से प्रतीत होता है, लेकिन अब नए एसएसपी के लिए ये भी चुनौती से कम नही होगा। कई बड़े जिलों की बागडोर संभाल चुके एसएसपी डॉक्टर शौर्य सुमन किसी कीमत पर ऐसे अधिकारियों को बख्शने के मूड में नही दिखाई दे रहे है। शहरी क्षेत्र में क्राइम कंट्रोल करना है तो रात्रि गश्ती के साथ साथ सदर अनुमंडल के कई थानेदारों पर एसएसपी साहब का एक्शन जरूरी है। कई थानेदार के तो जमीन माफियाओं के साठ गांठ भी है जबकि शराब की तस्करी का जवाब ही नही है। खास कर बनमनखी, धमदाहा, बायसी अनुमंडल के थाना क्षेत्रों में तस्कर बड़े पैमाने पर सिंडीकेट बना कर काम कर रहे हैं। अगर बड़े साहब या यूं कहे कि एसपी साहब का प्रेशर बढ़ता है तो फिर छोटी मछलियों को जाल में फंसा कर ऐसे थानेदारों के द्वारा जेल भेज दिया जाता है। सदर अनुमंडल के थाना क्षेत्रों में आजकल दारोगा थानेदार सब का भरोसा कम होता जा रहा है। लोगों का कहना है कि कई ऐसे ऐसे थाने हैं जहां अचानक जांच करने पर बड़े माफिया या तस्कर मिल जाएंगे।

सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करने की जरूरत

हालांकि लोगों का यह भी कहना है कि पूर्णिया में अगर एसएसपी क्राइम कंट्रोल करना चाहते हैं तो फिर उन्हें सबसे पहले थानों में लंबे समय से जमे थानेदारों को उधर उधर करना पड़ेगा। लोगों का कहना है कि जिले के अधिकांश थानों खास कर ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में पुलिस अधिकारी लंबे समय से एक ही जगह जमे हुए हैं जिससे उनकी कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होते हैं। इतना ही नहीं छोटे मोटे अपराध से लेकर शराब और अन्य मादक पदार्थों के कारोबार समेत अन्य बड़े आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी का भी यह एक बड़ा कारण ही सकता है। लोगों ने पुलिस गश्ती में भी बढ़ोतरी की मांग की तथा स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड, चौक चौराहे समेत अन्य सार्वजनिक और महत्वपूर्ण जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करने की जरूरत बताई।

चोरी, लूट, छिनतई समेत आपराधिक घटनाओं में हो रही वृद्धि

लोगों का कहना है कि जिले में छिनतई, लूट, चोरी झपटमारी समेत अन्य आपराधिक घटनाओं में फिर से बढ़ोतरी शुरू हो गई है। पुलिस एक तरफ लगातार गश्ती के दावे करती है तो दूसरी तरफ जगह जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं बावजूद इसके अपराधियों के मन में पुलिस का डर नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्णिया के मरंगा, सदर, के हाट, लाइन बाजार, कटिहार मोड़, मधुबनी बाजार समेत कई इलाकों में बाइक चोरी की घटनाओं में इस कदर बढ़ोतरी हुई है कि अब लोग अपनी बाइक खड़ी करने में भी डरते हैं। लोगों ने इसके लिए सीधे सीधे पुलिस की सुस्ती और लापरवाही का आरोप लगाया।

कारोबारियों में है चिंता का माहौल

इसके साथ ही लोगों ने गुलाब बाग इलाके में देह व्यापार समेत अन्य मामलों में भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि यह इलाका जिले के व्यापार का मुख्य केंद्र है, जहां से प्रतिदिन करोड़ों रुपए का कारोबार किया जाता है। इस इलाके में भी अपराधियों की सक्रियता काफी देखी जा रही है। जिले में बढ़ते आपराधिक घटनाओं को देख कारोबारी हमेशा डर के साए में रहते हैं। इतना ही नहीं जिले में शराबबंदी के बावजूद शराब समेत अन्य सूखे नशे का कारोबार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों ने इस मामले में भी पुलिस पर ही लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जिले में शायद ही कोई गांव या इलाका होगा जहां सूखे नशे का कारोबार नहीं होता होगा। सूखे नशे की लत ने युवाओं को बर्बाद कर दिया है। जिन हाथों में कलम होना चाहिए आज कल उन्हीं हाथ में चिलम और नशे का इंजेक्शन दिख रहा है।

  

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