एसपी मैडम आपके जिले के थानेदारों को कुछ पता ही नहीं! जिले में खुलेआम अवैध नशे का कारोबार है जोरों पर...

नशे का फैलता नेटवर्क: कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

पूर्णिया: पूरे बिहार में वर्ष 2016 से शराबबंदी कानून लागू है और इसके बाद से ही राज्य में अवैध नशा का कारोबार भी शुरू हो गया है। राज्य का कोई जिला नहीं है जो अवैध नशे के कारोबार की चपेट में न हो। इसी कड़ी में पूर्णिया भी अवैध नशे की जद में है। जिले का कोई थाना क्षेत्र या गांव ऐसा नहीं है जो इससे अछूता हो। जिले के लगभग सभी थाना क्षेत्रों में स्मैक, अवैध शराब और प्रतिबंधित कफ सिरप का संगठित कारोबार का सिंडिकेट चल रहा है। इसके साथ साथ सेक्स रैकेट का का अवैध धंधा भी परवान पर है। गुलाब बाग जीरो माइल कटिहार मोड़, हरदा में देह व्यापार का धंधा फल फूल रहा है। हालांकि पुलिस कभी कभार कार्रवाई जरूर करती है लेकिन कुछ ही दिनों के बाद फिर से यह गुलजार हो जाता है। जिले के सदर, कसबा, बायसी, के नगर थाना क्षेत्र में स्मैक गांजा की तस्करी रुक नहीं रही है।

नये सदर एसडीपीओ ने आते ही गांजा और स्मैक तस्करों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मगर इसके बाद भी तस्करी का संगठित गिरोह पुलिस को चुनौती दे रहा है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक से दो ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं और इनके माध्यम से गांव-गांव तक नशे का जाल फैल चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि आज स्थिति यह है कि अनुमंडल का शायद ही कोई गांव बचा हो, जहां नशे का प्रभाव नहीं पहुंचा हो। युवाओं के बीच स्मैक, शराब और नशीले कफ सिरप की बढ़ती खपत सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

मामले में स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस समय-समय पर कार्रवाई कर कुछ छोटे कारोबारियों या वाहकों को गिरफ्तार करती है और मामले का खुलासा कर अपनी उपलब्धि बताती है, लेकिन पूरे सिंडिकेट को संचालित करने वाले कथित सरगनाओं तक कार्रवाई शायद ही पहुंच पाती है। लगभग हर मामले में पुलिस की ओर से जांच कर गिरोह के मुख्य संचालकों तक पहुंचने और अवैध संपत्ति जब्त करने की बात कही जाती है, लेकिन इसके परिणाम आम लोगों को नजर नहीं आते। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपी जांच, केस डायरी और चार्जशीट की प्रक्रिया के दौरान जमानत पर बाहर आ जाते हैं और बाद में फिर उसी नेटवर्क से जुड़कर अवैध कारोबार में सक्रिय हो जाते हैं। इससे नशे के कारोबार पर स्थायी रोक नहीं लग पा रही है।

अनुमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में सुनसान स्थानों, खेतों के किनारों, पुल-पुलियों और खाली पड़ी जमीनों पर बड़ी संख्या में स्मैक के रैपर देखे जा सकते हैं। वहीं रिहायशी इलाकों, सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर अंग्रेजी शराब तथा कफ सिरप की खाली बोतलें भी अक्सर दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये दृश्य इस बात की ओर संकेत करते हैं कि नशे का कारोबार और उसका सेवन व्यापक स्तर पर जारी है।

  

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