MLC चुनाव में 9 सीटों पर समीकरण फिट, 10वीं सीट का क्या होगा? NDA को मिलेगा विपक्षी विधायकों का साथ?

पटना: सोमवार का दिन बिहार में राजनीतिक हलचल वाला दिन रहा। MLC चुनाव को लेकर एनडीए और राजद के उम्मीदवारों ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल किया। इन उम्मीदवारों में 9 एनडीए के हैं जबकि एक राजद के सुनील सिंह। एनडीए में जदयू की तरफ से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और उप चुनाव के लिए ललन प्रसाद, भाजपा की तरफ से पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित ने जबकि लोजपा(रा) से अशरफ अंसारी ने अपना नामांकन दाखिल किया। एमएलसी चुनाव में नामांकन के दौरान एनडीए से सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, चिराग पासवान, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत कई मंत्री और विधायक मौजूद रहे।

विधान परिषद की 10 सीटों में से 8 पर एनडीए और एक सीट पर राजद की सीधी जीत मानी जा रही है जबकि दसवीं सीट के लिए एनडीए को विपक्षी विधायकों के क्रॉस वोटिंग की आवश्यकता होगी। बिहार विधानसभा में वर्तमान में 242 विधायक हैं और ऐसे में एक सीट पर जीत के लिए 24.2 वोटो की आवश्यकता होगी। इसके अनुसार नौ सीटों का परिणाम लगभग स्पष्ट दिखाई देता है। सबसे दिलचस्प मुकाबला दसवीं सीट को लेकर है। इस सीट पर जीत के लिए एनडीए को अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। इसके लिए या तो महागठबंधन के विधायकों का क्रॉस वोटिंग करना जरूरी होगा या फिर विपक्ष के कुछ विधायक मतदान से अनुपस्थित रहें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा संख्या बल के आधार पर बिना विपक्षी खेमे में बड़ी टूट के एनडीए के लिए दसवीं सीट हासिल करना आसान नहीं होगा। हालांकि चुनावी राजनीति में अंतिम समय तक समीकरण बदलने की संभावनाओं से इनकार भी नहीं किया जा सकता।

दसवीं सीट को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया था। उस चुनाव में महागठबंधन के चार विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए थे, जिनमें कांग्रेस के तीन और राजद का एक विधायक था। इसका लाभ एनडीए को मिला और उसका पांचवां उम्मीदवार जीतने में सफल रहा। हालांकि विधान परिषद चुनाव की स्थिति कुछ अलग है। यहां अतिरिक्त सीट जीतने के लिए अपेक्षाकृत अधिक मतों की जरूरत होगी। ऐसे में केवल कुछ विधायकों की अनुपस्थिति से काम नहीं चलेगा, बल्कि विपक्षी खेमे में बड़ी राजनीतिक टूट या व्यापक क्रॉस वोटिंग की स्थिति बनने पर ही एनडीए दसवीं सीट पर दावा मजबूत कर सकेगा।

  

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