'जन्म नहीं योग्यता से तय हो भविष्य', पूर्णिया में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा...

पूर्णिया: जन्म नहीं बल्कि योग्यता से तय हो भविष्य के आह्वान के साथ थाना चौक स्थित धरनास्थल पर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि देश में सामाजिक न्याय के उद्देश्य को बनाए रखते हुए समान अवसर, प्रतिभा का सम्मान तथा वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता का लाभ पहुंचाना समय की मांग है। धरना को संबोधित करते हुए डॉ. एस. एम. झा ने कहा कि हम किसी गरीब के खिलाफ नहीं हैं। हम किसी दलित, महादलित या पिछड़े भाई-बहन के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं। हमारा सवाल उस व्यवस्था से है जिसमें किसी बच्चे की पहचान उसके सपनों, प्रतिभा और मेहनत से पहले उसके जन्म से तय कर दी जाती है।

उन्होंने कहा कि गरीबी की कोई जाति नहीं होती, बेरोजगारी की कोई जाति नहीं होती, भूख की कोई जाति नहीं होती और सपनों की भी कोई जाति नहीं होती। फिर अवसरों और सहायता की नीतियों पर यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार विचार क्यों न हो कि वास्तविक जरूरतमंद और प्रतिभाशाली व्यक्ति पीछे न छूटे उन्होंने कहा कि मदद चाहिए तो गरीब को मिले, अवसर चाहिए तो वंचित को मिले और सहारा चाहिए तो जरूरतमंद को मिले। लेकिन केवल जन्म की पहचान किसी बच्चे के भविष्य की अंतिम सीमा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी कोई व्यक्ति केवल जन्म से नहीं बनता। योग्यता, ज्ञान, परिश्रम और प्रशिक्षण ही उसे सक्षम बनाते हैं। इसलिए व्यवस्था में सामाजिक न्याय के साथ-साथ योग्यता और वास्तविक वंचना के प्रश्न पर भी गंभीर राष्ट्रीय विमर्श होना चाहिए। आरक्षण का लाभ अंतिम जरूरतमंद तक पहुंचे। 

शौर्य राय ने कहा कि आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को आगे लाना और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा जब रामविलास पासवान सामाजिक रूप से वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व करते थे, तब उन्हें मिले अवसर सामाजिक प्रतिनिधित्व की लड़ाई का हिस्सा थे। आज चिराग पासवान जैसे सक्षम नेताओं से हमारी अपेक्षा है कि वे अपने ही वर्ग के सबसे गरीब और वास्तविक रूप से वंचित लोगों तक आरक्षण एवं सरकारी अवसरों का लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावी पहल करें। आने वाली पीढ़ियों में भी यही जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण होगी। सवाल किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के लाभ के न्यायपूर्ण वितरण का है। अन्य वक्ताओं ने भी इस मुद्दे पर जोरदार आवाज उठाते हुए वर्तमान आरक्षण व्यवस्था पर अविलम्ब समीक्षा को समय का मांग बताया धरना को संबोधित करने वाले अन्य प्रमुख वक्ताओं ने कहा कि देश में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए जहां जाति पहचान से अधिक प्रतिभा, आर्थिक स्थिति और वास्तविक वंचना को महत्व मिले। डॉ. एस. एम. झा ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति अथवा समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि समानता, न्याय, प्रतिभा और मानवीय गरिमा के पक्ष में लोकतांत्रिक आवाज है।

उन्होंने आगे कहा कि आज पूर्णिया से हमारी आवाज स्पष्ट है बच्चे का जन्म उसके हाथ में नहीं होता, लेकिन उसके सपनों को अवसर देना समाज और राज्य की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जाति जन्म से मिलती है, योग्यता मेहनत से भविष्य का फैसला किस आधार पर होगा? अन्त में सबने एक सुर में कहा हम आरक्षण के खिलाफ नहीं, अन्यायपूर्ण अवसर-वंचना के खिलाफ हैं।

  

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