दुर्घटना पर संवेदना और न्याय दोनों जरूरी, मुजफ्फरपुर में सड़क दुर्घटना मामले में भाजपा नेत्री ने...

मुजफ्फरपुर: बीते दिनों मुजफ्फरपुर में भाजपा का झंडा लगी एक लग्जरी कार से दुर्घटना में दो बच्चों की मौत का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। मामले को लेकर इलाके में लोग भाजपा नेत्री नूतन गुप्ता और उनके पति पंकज पटेल के विरुद्ध सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार हमलावर हैं और दोनों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर अपने विरुद्ध लगातार चल रहे अभियान और ट्रोल से परेशान हो कर अब भाजपा नेत्री नूतन गुप्ता ने चुप्पी तोड़ी है। मामले में उन्होंने कहा कि दुर्घटना पर संवेदना भी ज़रूरी है और न्याय भी, लेकिन किसी की छवि को निशाना बनाना उचित नहीं।

भाजपा नेत्री नूतन गुप्ता ने कहा कि बीते दिनों सड़क दुर्घटना में दो बच्चों की मौत के बाद इस पूरी घटना के बीच एक सवाल लगातार मन में उठता है कि क्या किसी भी सड़क दुर्घटना को केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर पेश करना उचित है? पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया और कई मंचों पर मेरे नाम को इस तरह उछाला गया, जैसे पूरी घटना का केंद्र केवल उनकी पहचान हो। ऐसा माहौल बनाया गया मानो फैसला अदालत नहीं, सोशल मीडिया ने पहले ही सुना दिया हो।

हम सभी जानते हैं कि सड़क दुर्घटनाएँ दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं। हर वर्ष हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। कोई भी व्यक्ति जानबूझकर यह नहीं चाहता कि उसकी गाड़ी से किसी की जान जाए। यदि चालक की गलती है, यदि कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसके लिए कानून मौजूद है। लेकिन बिना जांच पूरी हुए किसी व्यक्ति की छवि को स्थायी रूप से अपराधी की तरह प्रस्तुत करना न्याय की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि एक समय गांवों में अंधविश्वास फैला हुआ था। लोग बच्चों से कहते थे कि नए पुल या नए मकान के पास मत जाना, वहां बलि चढ़ा दी जाएगी। डर इतना गहरा बैठ जाता था कि सच और अफवाह में फर्क करना मुश्किल हो जाता था। आज के दौर में सोशल मीडिया पर कई बार वही स्थिति दिखाई देती है। लगातार एक ही तरह का प्रचार किसी व्यक्ति के प्रति ऐसी धारणा बना देता है कि लोग तथ्य जानने से पहले ही निर्णय सुना देते हैं।>

यह बात किसी एक राजनीतिक दल या एक व्यक्ति की नहीं है। कल यदि यही घटना किसी और नेता, अधिकारी या सामान्य नागरिक के साथ होती, तब भी हमारी राय यही होती कि पीड़ितों को न्याय मिले और किसी भी व्यक्ति के बारे में निष्कर्ष केवल निष्पक्ष जांच के बाद निकाला जाए। हम पीड़ित परिवार के न्याय की मांग के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। लेकिन साथ ही यह भी मानते हैं कि न्याय का अर्थ केवल भावनाओं के आधार पर फैसला देना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, सच्चाई और कानून के आधार पर निर्णय लेना है। आइए, हम संवेदना भी रखें, न्याय की मांग भी करें, लेकिन अफवाह, राजनीतिक पूर्वाग्रह और सोशल मीडिया ट्रायल से बचें। यही एक जिम्मेदार समाज की पहचान है। बता दें कि मुजफ्फरपुर में दुर्घटना के बाद लगातार सोशल मीडिया पर यह खबर चलाई गई कि भाजपा नेता की गाड़ी से बच्चे की मौत हुई। मामले में कुछ लोगों ने जांच पूरी होने से पहले ही कार्रवाई किए जाने तक की मांग की।

  

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