तेजस्वी के लोक भवन मार्च पर एनडीए ने एक सुर में तेजस्वी पर कसा तंज, भाजपा और जदयू ने पूछा 'अब नींद खुली...'?'
- by Manjesh Kumar
- 18-Aug-2026
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पटना: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव बुधवार को लोक भवन मार्च करेंगे। मार्च के संबंध में तेजस्वी यादव ने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान सीवान में एके 47 से फायरिंग मामले में सरकार ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है कि किसके आदेश पर गोली चलाई गई। तेजस्वी यादव के लोक भवन मार्च को लेकर एनडीए के नेताओं ने पहले कोई खास प्रतिक्रिया दी लेकिन अब जदयू भाजपा दोनों ने तीखा हमला बोला है। भाजपा और जदयू ने तेजस्वी यादव पर सोए रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में जांच के तुरंत बाद जवान को निलंबित कर दिया गया और उच्चस्तरीय जांच की जा रही है और तेजस्वी यादव की नींद अब करीब 20 दिन बीत जाने के बाद खुली है।
मामले में भाजपा की प्रदेश महामंत्री सह प्रदेश प्रवक्ता प्रीति शेखर ने तेजस्वी पर अवसरवादिता की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि घटना के करीब 20 दिन बीत जाने के बाद तेजस्वी यादव की नींद खुली है। इस मामले में पहले ही सरकार एक्शन ले चुकी है। डॉ प्रीति शेखर ने कहा कि घटना के 20 दिन बाद तेजस्वी की नींद खुली है और वह सोशल मीडिया पर अवसरवादिता की राजनीति करने चले हैं। मैं आपको स्पष्ट कर देती हूं कि सम्राट चौधरी की सरकार हर आपराधिक मामलों पर त्वरित कार्रवाई करती है। उस घटना में भी जिस जवान ने फायरिंग की उसे निलंबित कर दिया गया और न्यायिक रूप से जांच की जा रही है। आगे जांचोपरांत जो भी दोषी होंगे उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
डॉ प्रीति शेखर ने तेजस्वी से सवाल करते हुए कहा कि याद करिए आपकी पार्टी और आपकी सरकार में पहले किस तरह से सत्ता संरक्षित अपराध होते थे। अपराधियों को आपके घर से संरक्षण मिलता था जबकि आज अपराधी अपराध करने से पहले सोचता है। उसे इस बात का ज्ञान है कि गलत करेगा तो बिहार की पुलिस उसे लंगड़ा बनाने के लिए तैयार है, बिहार की सरकार त्वरित कार्रवाई कर न्याय करते हुए जनता के मन पर राज कर रही है। आप एक जिम्मेवार विपक्ष की भूमिका अदा करिए।
वहीं दूसरी तरफ जदयू ने भी तेजस्वी पर तीखा तंज करते हुए तीखे सवाल भी किया है। जदयू के प्रदेश प्रवक्ता डॉ निहोरा प्रसाद यादव और शंभूनाथ सिन्हा ने तेजस्वी के लोक भवन मार्च को गिरती राजनीतिक साख बचाने की एक सोची समझी राजनीतिक नौटंकी कराए दिया। उन्होंने कहा कि जब तेजस्वी को छात्रों की इतनी ही चिंता है तो फिर झारखंड के छात्रों के लिए आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। तेजस्वी का यह मार्च छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए नहीं बल्कि अपनी कमजोर पड़ती राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश है।


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