गंगा के रौद्र रूप से राघोपुर काजीकोरैया बांध ध्वस्त, ग्रामीणों में दहशत, मंत्री-डीएम ने लिया जायजा

भागलपुर: भागलपुर के नवगछिया में गंगा के बढ़ते कटाव ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। राघोपुर - काजीकोरैया बांध का बड़ा हिस्सा गंगा की तेज धार की चपेट में आकर ध्वस्त हो गया है। बांध टूटने के बाद कटाव का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के बीच दहशत का माहौल है। कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से लगातार कटाव रोधी कार्य कराया जा रहा है, लेकिन गंगा की तेज धारा के सामने अब तक किए गए इंतजाम नाकाफी साबित होते दिख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये के कटाव रोधी कार्य के बावजूद नदी लगातार जमीन को अपने आगोश में ले रही है। ऐसे में लोगों को अब घर और जमीन दोनों के सुरक्षित रहने की चिंता सता रही है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री सह स्थानीय विधायक इंजीनियर शैलेंद्र और भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने कटाव प्रभावित इलाके का मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने बांध की स्थिति और चल रहे कटावरोधी कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी भी सामने आई। मंत्री और डीएम ने मुख्य बांध की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कटाव रोधी कार्य में तेजी लाने और तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी अलंकृता पांडे ने बताया कि कटाव रोधी कार्य को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान मैनपावर की कमी की शिकायत सामने आई है, जिसे तत्काल दूर किया जाएगा, ताकि काम की रफ्तार बढ़ाई जा सके और मुख्य बांध को सुरक्षित रखा जा सके। 

वहीं, पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने कहा कि पूरे इलाके का जायजा लिया गया है और कटाव को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गंगा के रुख में बदलाव की आशंका पहले ही जताई गई थी और समय रहते इस दिशा में काम करने की जरूरत थी। मंत्री ने कहा कि वह गंगा मैया में आस्था रखते हैं और कटाव रुकने के लिए प्रार्थना भी की है। साथ ही उन्होंने राजनीतिक बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी को अगर कोई नैरेटिव बनाना है तो वह बना सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि दो मंत्रियों का क्षेत्र होने से क्या फर्क पड़ता है, क्योंकि इससे पहले भी दूसरे इलाकों में कटाव की घटनाएं होती रही हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती मुख्य बांध को सुरक्षित रखने और तेजी से बढ़ रहे कटाव पर तत्काल नियंत्रण पाने की है। ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और जल संसाधन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

  

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