भारत के पूर्वी मोर्चे पर बदलते रणनीतिक परिदृश्य पर बिहार लोक भवन में विशेष व्याख्यान

पटना: बिहार लोक भवन में ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला के तहत भारत के पूर्वी मोर्चे से जुड़े रणनीतिक महत्व के मुद्दों पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें म्यांमार और बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक हालात, सुरक्षा चुनौतियों और भारत के सामने मौजूद कूटनीतिक विकल्पों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में दो वरिष्ठ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने अपने विचार रखे। लेफ्टिनेंट जनरल पी सी नायर ने म्यांमार और मेजर जनरल जे एस नंदा ने बांग्लादेश की स्थिति पर चर्चा की।  म्यांमार के संबंध में विचार व्यक्त करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल पी सी नायर ने कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’, पूर्वाेत्तर राज्यों और आसियान देशों के साथ भारत के संपर्क के लिए म्यांमार का विशेष महत्व है। उन्होंने भारत-म्यांमार सीमा, उग्रवाद, सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के आवागमन, मादक पदार्थों की तस्करी और दोनों देशों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने म्यांमार में चीन के बढ़ते प्रभाव को भी भारत के लिए चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि म्यांमार में भारत के हितों की रक्षा के लिए सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार तथा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को भी मजबूत करना जरूरी है।

बांग्लादेश पर चर्चा करते हुए मेजर जनरल जे एस नंदा ने शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद बदले हालात और भारत के सामने पैदा हुई चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ता कट्टरपंथ और वहां के रक्षा तंत्र में इसके प्रभाव को भारत के लिए गंभीर चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश के युवाओं से बेहतर संपर्क बनाने और वहाँ की बदली राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार भारत की कूटनीतिक नीति में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेश के साथ ‘बड़े भाई’ वाली छवि के बजाय एक जिम्मेदार और सहयोगी बड़े भाई के रूप में संबंध आगे बढ़ाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपनी बात और अपनी छवि को लेकर जनमत और धारणा के स्तर पर भी सक्रिय रहना होगा।

विषय की शुरुआत करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बिहार लोक भवन विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक और जानकारीपूर्ण चर्चा के लिए एक मंच के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के पूर्वी मोर्चे को केवल मौजूदा घटनाओं के संदर्भ में नहीं, बल्कि लंबे समय की रणनीतिक सोच और व्यापक दृष्टिकोण के साथ समझने की जरूरत है। इससे पहले राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बिहार लोक भवन बौद्धिक संवाद, सार्थक चर्चा और गंभीर विषयों पर विचार-विमर्श की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रो चिंतामणि महापात्र ने किया। व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान विभिन्न लोगों ने विषय से जुड़े सवाल पूछे और दोनों पूर्व सैन्य अधिकारियों ने उनके जवाब दिए। इस अवसर पर राज्य सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी तथा अन्य लोग उपस्थित थे।

  

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