पंचायत सरकार भवन निर्माण में संवेदक कर रहा था गड़बड़ी, शिकायत के बाद जांच में मिली कई अनियमितताएं

कटिहार: सुजापुर पंचायत में सरकारी राशि से निर्माणाधीन पंचायत सरकार भवन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतकर्ता नईम अख्तर की ओर से उठाए गए सवाल अब जांच तक पहुंच गए हैं। गुरुवार को निर्माण कार्य की जांच के दौरान जंग लगे स्टील के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद उसके प्रयोग पर रोक लगाए जाने की जानकारी दी गई। वहीं छत में स्टील की दूरी, रिंग की दूरी, स्लैब में सीमेंट की मात्रा, लोकल बालू, गिट्टी और DPC की ऊंचाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। 

नईम अख्तर ने जिला पदाधिकारी को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि पंचायत सरकार भवन के निर्माण में प्राक्कलन और तकनीकी मानकों के विपरीत कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने छत की ढलाई से पहले स्वतंत्र वरीय तकनीकी टीम से निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की थी। जांच के दौरान नईम अख्तर ने आरोप लगाया कि छत में स्टील की दूरी प्राक्कलन में निर्धारित दूरी की तुलना में लगभग दोगुनी रखी गई है, जबकि रिंग की दूरी भी अधिक है। शौचालय की टंकी का निर्माण प्राक्कलन से कम किए जाने और स्लैब में निर्धारित मात्रा में सीमेंट नहीं डालने का भी आरोप लगाया गया।

छत की ढलाई से पहले ही गिट्टी पर सवाल

नईम अख्तर के अनुसार छत की ढलाई के लिए लाई गई गिट्टी की गुणवत्ता भी संदिग्ध है। भवन निर्माण में लोकल बालू के इस्तेमाल का आरोप है। DPC/प्लिंथ की कम ऊंचाई को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। उनका कहना है कि वर्तमान में पानी DPC के लगभग बराबर पहुंच चुका है और बाढ़ के समय भवन में पानी प्रवेश करने की आशंका है। नईम अख्तर ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उनके आवेदन में उठाए गए सभी बिंदुओं की बिंदुवार तकनीकी जांच नहीं की गई। उन्होंने MB, BOQ, स्वीकृत डिजाइन, स्टील की साइज-वजन, RCC, निर्माण सामग्री और DPC की ऊंचाई का स्वतंत्र तकनीकी मिलान कराने की मांग की है।

BPRO बोले—अनियमितता मिली, जंग लगे छड़ पर रोक

BPRO राजकुमार सिंह ने बताया कि जांच में कार्य में भारी अनियमितता देखी गई है। जंग लगे छड़ के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है तथा संबंधित विभाग और एजेंसी को इसकी सूचना दे दी गई है। जांच रिपोर्ट जिला स्तर पर भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि कार्य में सुधार कराया जाएगा, अन्यथा संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल जिला स्तर की विस्तृत तकनीकी जांच पर है कि निर्माण में कितनी अनियमितता हुई, इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होती है और सरकारी भवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कार्रवाई होती है।

  

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