हिंदी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय 44 वें अधिवेशन का उद्घाटन करेंगे राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान
- by Raushan Pratyek Media
- 19-Dec-2025
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पटना से ब्यूरो चीफ अजय शंकर की रिपोर्ट
पटना। अपनी स्थापना के 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुका बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन अपने दो दिवसीय 44वें महाधिवेशन के लिए पूरी तरह सजधज कर हो चुका है। 20-21 दिसम्बर को सम्मेलन-सभागार में आयोजित होने वाले इस महाधिवेशन के दो दिनों में हिन्दी भाषा और साहित्य के उन्नयन पर गम्भीर विमर्श होंगे, जिसके लिए ७ वैचारिक-सत्र आयोजित किए जाएंगे।
विदुषी लेखिकाओं और विद्वान साहित्यकारों को नामित अलंकरणों से विभूषित किया जाएगा। इस दौरान एक विराट राष्ट्रीय कवि-सम्मेलन भी संपन्न होगा। सम्मेलन के कला-विभाग की ओर से प्रथम दिवस की संध्या भव्य सांस्कृतिक उत्सव भी संपन्न होगा। महाधिवेशन का उद्घाटन 20 दिसम्बर को पूर्वाहन 10.30 बजे बिहार के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान करेंगे।
सम्मेलन अध्यक्ष डाॅ. अनिल सुलभ ने यह जानकारी देते हुए बताया कि दोनों दिनों के कार्यक्रम सुनिश्चित किए जा चुके हैं। नामित अलंकरणों से विभूषित किए जाने वाले विद्वानों और विदुषियों के चयन भी किए जा चुके हैं। यह महाधिवेशन सिख-पंथ के नवम गुरु और महान बलिदानी संत गुरु तेग बाहादुर के महा-बलिदान के 350वें वर्ष को समर्पित किया गया है।
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प्रथम वैचारिक-सत्र का विषय ‘गुरु तेग बहादुर का सांस्कृतिक और साहित्यिक अवदान’ रखा गया है। अन्य सत्रों के विषय क्रमशः ‘हिन्दी कथा-साहित्य में बिहार का योगदान’, ‘हिन्दी में विज्ञान साहित्य’, ‘आधुनिकता और नयी कविता’, भारत के हिन्दीतर साहित्य के संवर्द्धन में हिन्दी’, ‘राष्ट्रभाषा आंदोलन की विधिक व्यवस्था तथा ‘काव्य-साहित्य में बिहार का योगदान’ निश्चित किए गए हैं।
इन विषयों पर चर्चा में भाग लेने वाले प्रमुख विद्वानों और विदुषियों में महात्मा गांधी द्वारा स्थापित राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित, केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के निदेशक डाॅ. सुनील बाबूराव कुलकर्णी, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डाॅ. अंशुमान, केंद्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के संकायाध्यक्ष डाॅ. अवधेश कुमार, अलीगढ़ के विद्वान डाॅ. दिनेश शर्मा, डाॅ. देवेंद्र देव मिर्जापुरी (मिर्ज़ापुर), डा सुशील कुमार ‘साहित्येन्दु’ (सुल्तानपुर), ईश्वर चंद्र विद्यावाचस्पति (संत कबीर नगर), डाॅ राम दरश राय (गोरखपुर), डाॅ. लता चौहान (बेंगलुरु), बेबी कारफ़रमा (कोलकाता), डाॅ. वीणा मेदनी (बंगलुरु), डाॅ. गणशेटवार साईंनाथ नागनाथ (पुदुचेरी), ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री (फ़र्रुख़ाबाद), डाॅ. शिवानन्द शुक्ल (रायबरेली), डाॅ. जंग बहादुर पांडेय (राँची) समेत कुल नब्बे विद्वानों और विदुषियों के नाम सम्मिलित हैं।
महाधिवेशन की तैयारी को लेकर डाॅ. अनिल सुलभ की अध्यक्षता में सम्मेलन की कार्यसमिति और स्वागत समिति के साथ अन्य उपसमितियों की अंतिम बैठक हुई। इसमें सम्मेलन के उपाध्यक्ष डाॅ. उपेंद्रनाथ पांडेय, अर्थमंत्री कुमार अनुपम, संगठन मंत्री डाॅ. शालिनी पांडेय, लोकभाषा मंत्री डाॅ. पुष्पा जमुआर, प्रचार मंत्री विभा रानी श्रीवास्तव, प्रबंधमंत्री कृष्ण रंजन सिंह, किरण सिंह, सुजाता मिश्र, डाॅ. पूनम आनंद, आराधना प्रसाद, डाॅ. सुमेधा पाठक, डाॅ. प्रियंवदा मिश्र, डाॅ. सुधा सिन्हा, डाॅ. अर्चना त्रिपाठी, डाॅ. ऋचा वर्मा, अनुभा गुप्ता, अनुपमा नाथ, डाॅ. विद्या चौधरी, सरिता सिन्हा, डाॅ. पंकज पांडेय, बांके बिहारी साव, इंदु भूषण सहाय, प्रवीर पंकज, प्रेम लता सिंह राजपूत, रौली कुमारी, डाॅ. सुधा पांडेय, सूर्य प्रकाश उपाध्याय समेत सभी समितियों के अधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।


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