भागलपुर के विशनपुर में गोबर-धन योजना ने खोला समृद्धि का नया द्वार, जीविका दीदियों के हाथों नया रोजगार

भागलपुर: भागलपुर के गोराडीह प्रखंड अंतर्गत विशनपुर ग्राम पंचायत में गोबर-धन योजना धुआं-रहित ईंधन उपलब्ध कराने, उच्च स्तर के कंपोस्ट का स्रोत बनाने के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि का आधार बन चुका है। गांव के लोगों का कहना है कि योजना के तहत यहां संचालित बायोगैस प्लांट ग्रामीणों के लिए ईंधन के विकल्प से बढ़कर उनकी सोच में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाला संयंत्र प्रमाणित हुआ है। पंचायत में बायोगैस संयंत्र ने यह संदेश दिया है कि गोबर सिर्फ उपला बनाने या खेतों में फेंक दिये जाने वाला अपशिष्ट न होकर पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों के जीवन स्तर में बदलाव के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

भागलपुर में गोराडीह प्रखंड के विशनपुर पंचायत में अधिकांश लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि एवं पशुपालन है। यहां पशुपालन के सह-उत्पाद के रूप में बड़ी मात्रा में गोबर की प्राप्ति होती थी, लेकिन उसका व्यवस्थित तरीके से सही उपयोग नहीं होने से कई समस्या उत्पन्न हो गई थी। जागरुकता एवं जानकारी के अभाव में ग्रामीण गोबर एवं जैविक कचड़े को जहां-तहां फेंक देते थे। वहीं, कुछ लोग गोबर से उपला बना कर उसका उपयोग जलावन के रूप में करते थे। ऐसे में पशुपालन करने वाले ग्रामीणों को आय तो अर्जित नहीं होती थी, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा था। गांव में जगह-जगह पड़ा गोबर का ढेर गंदगी और प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा था। विशेष रूप से बरसात के मौसम में इस गोबर से काफी गंदगी फैलती थी। 

समस्या को देखते हुए जिला जल एवं स्वच्छता समिति, भागलपुर ने यहां गोबर-धन योजना के तहत बायोगैस प्लांट स्थापित करने का फैसला लिया। इसी दिशा में प्लांट के लिए जमीन की तलाश और फिर इसके लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद पंचायत के सरमसपुर कोहड़ा में गोबरधन योजना अंतर्गत बायोगैस प्लांट की स्थापना की गई। आज इस प्लांट का संचालन समूह की दीदियों के हाथों किया जा रहा है और इससे कई परिवारों को सुबह-शाम की ईंधन के लिए नियमित बायोगैस और खेती के लिए कंपोस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित हो पाई है। गांव के लोगों का कहना है कि बायोगैस प्लांट के संचालन से पंचायत पर व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ा है। साथ ही दीर्घकालीन प्रभाव के रूप में पर्यावरण संतुलन की नई राह बनी है। गांव की स्वच्छता की स्थिति में जहां एक तरफ सुधार हुआ है वहीं दूसरी ओर बायोगैस उत्पादन से जुड़ीं जीविका दीदियों की आय में बढ़ोतरी हुई है।

  

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