भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में हटाए गए डीएसपी की बढ़ने वाली है मुश्किलें, 19 वर्ष पुराना एक और मामला खुला, इस दिन होगी सुनवाई
- by Manjesh Kumar
- 04-Jul-2026
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पटना: बीते महीने भोजपुर में चर्चित कथित भरत तिवारी एनकाउंटर मामला में चर्चा में आए एसडीपीओ राजेश वर्मा की अब मुश्किलें बढ़ने वाली है। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब उनके विरुद्ध मुजफ्फरपुर में करीब 19 वर्ष पुराना विवादित एक मामला भी सामने आया है। कहा जा रहा है कि दारोगा से प्रमोशन लेकर डीएसपी बने राजेश शर्मा का विवादों से पुराना नाता रहा है और मुजफ्फरपुर में भी एक विवादित मामला उनसे जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार राजेश शर्मा जब मुजफ्फरपुर में तैनात थे, तब करीब दो दशक पहले चतुर्भुज स्थान के रेडलाइट एरिया में एक नर्तकी के कोठे पर बदमाशों से मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान एक बदमाश मारा गया था और राजेश शर्मा के पैर में भी गोली लगी थी। इस मुठभेड़ से राजेश शर्मा चर्चा में जरूर आए लेकिन इसके बाद 2007 में ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में एक एनकाउंटर से वे विवादों में आ गए।
जानकारी के अनुसार 4 नवंबर 2007 की सुबह करीब 4 बजे ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एमआईटी कॉलेज के समीप पुलिस मुठभेड़ में तीन युवकों की मौत हो गई थी। मारे गए युवकों में सदर थाना क्षेत्र के लहलादपुर पताही निवासी मुकुल ठाकुर, काजी मोहम्मदपुर निवासी मनीष शर्मा (मनीष महिवाल) और शिवहर जिले के धनकौल निवासी सुबोध कुमार सिंह शामिल थे। पुलिस का दावा था कि वाहन जांच के दौरान रोकने पर युवकों ने 22 राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई में तीनों मारे गए। वहीं तीनों के परिजनों ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताया था। मामला तूल पकड़ने पर तत्कालीन डीआईजी ने सीआईडी से जांच कराई थी, जिसने पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे दी थी।
हालांकि, मानवाधिकार आयोग ने सीआईडी की इस जांच और चार्जशीट पर गंभीर सवाल उठाए थे। साल 2013 में मुजफ्फरपुर कोर्ट में तत्कालीन सदर थानेदार राजेश शर्मा समेत चार थाना प्रभारियों और कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था, जो गवाही न होने के कारण लंबित था। अब भरत तिवारी मामला के बाद इस मामले की भी चर्चा शुरू हो गई तथा बताया जा रहा है कि पुराना केस फिर से खुलने जा रहा है। मुठभेड़ में मारे गए मनीष की मां अनीता देवी ने मानवाधिकार आयोग के अधिवक्ता एस के झा के माध्यम से न्यायालय में आवेदन दिया है। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की है, जिससे आरोपी पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ने वाली है।


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