बिलौटी में उमड़ा जनसैलाब, हजारों लोगों ने 'शहीद भरत तिवारी - जिंदाबाद' के लगाए नारे...

भोजपुर: भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन चुका है और लगातार बयानबाजियों का दौर जारी है। इसी बीच बुधवार को भरत तिवारी के पैतृक गांव बिलौटी में जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिहार समेत दूसरे राज्यों से हजारों की संख्या में लोग बिलौटी पहुंचे जिन्होंने भरत तिवारी को शहीद का दर्जा दिया और जमकर नारेबाजी भी की। बताया जा रहा है कि बिलौटी में दोपहर तक करीब एक हजार से अधिक गाड़ियां पहुंच चुकी थी जबकि इसका सिलसिला लगातार जारी रहा। महापंचायत से पहले कई समर्थक तिरंगा लेकर भरत तिवारी के घर पहुंचे। इस दौरान भरत तिवारी अमर रहे के नारे लगाए गए। कुछ लोगों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ भी नारेबाजी की। गांव में माहौल पूरी तरह आंदोलनकारी नजर आया।

महापंचायत में उत्तर प्रदेश के कुछ ब्राह्मण संगठनों के प्रतिनिधियों के पहुंचने की भी जानकारी मिल रही है। भोजपुर के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। महापंचायत से पहले समर्थकों ने बिलौटी टाड़ इलाके के बोर्ड पर नया नाम लिख दिया। बोर्ड पर “शहीद भरत नगर” लिखा गया है। समर्थकों का कहना है कि भरत तिवारी ने गांव और बाढ़ पीड़ितों के लिए संघर्ष किया था। इसलिए उनके सम्मान में गांव का नाम उनके नाम पर रखा जाना चाहिए। भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने कहा कि उनके भाई जनता की समस्याओं के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन मुद्दों को लेकर भरत आवाज उठा रहे थे, उन्हें जल्द पूरा किया जाए। साथ ही एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। महापंचायत में शामिल लोगों ने निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और बाढ़ प्रभावित गांवों की समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।

बता दें कि 17 जून को भोजपुर में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की मौत हुई थी। परिजनों ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। भरत की मां ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले में जगदीशपुर एसडीपीओ, शाहपुर थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया जा चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। हालांकि जांच किस न्यायिक अधिकारी को सौंपी जाएगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। 

  

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