पंचायतों से टैक्स लिए जाने का असर पड़ेगा आम लोगों पर, राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा 'विकास के नाम पर डाला जा रहा है बोझ'

पटना: बक्सर के राजद सांसद सुधाकर सिंह इन दिनों लगातार राज्य सरकार की नीतियों को लेकर हमलावर हैं। सुधाकर सिंह ने एक बार फिर राज्य सरकार पर हमला बोला और बिहार की आर्थिक स्थिति को लेकर जम कर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार आज भी एक हाथ-निर्भर राज्य बना हुआ है। इसका मतलब यह है कि विकास के लिए बिहार को काफी हद तक केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों के सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता है। अपने संसाधन सीमित हैं, उद्योग कम हैं और रोजगार के अवसर भी उतने नहीं हैं जितने होने चाहिए। इसी वजह से बिहार पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि कर्ज में डूबे होने के बावजूद बिहार के लोग हिम्मत नहीं हारते। दूसरे कई राज्यों में जब आर्थिक तंगी आती है, जब कर्ज बढ़ता है तो वहां के लोग टूट जाते हैं, निराशा में चले जाते हैं। लेकिन बिहार की मिट्टी अलग है। यहां का आम आदमी मेहनत और लगन से जीना जानता है। चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, बिहार का किसान, मजदूर और युवा अपनी मेहनत से परिवार चलाता है और समय से दो-दो हाथ करता है। यही वजह है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद बिहार आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बिहार में जो जज्बा है वो दूसरे राज्यों में कम देखने को मिलता है। यहां लोग छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन संघर्ष से मुंह नहीं मोड़ते। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की कमी के बावजूद बिहार के बच्चे बड़े-बड़े शहरों में जाकर नाम रोशन कर रहे हैं। मजदूर दूसरे राज्यों में जाकर मेहनत कर रहा है और अपने घर का खर्च चला रहा है। यानी कर्ज और संसाधनों की कमी ने बिहार के लोगों का आत्मविश्वास नहीं तोड़ा है।

इसी बीच सुधाकर सिंह ने पंचायती राज व्यवस्था के तहत लगने वाले नए टैक्स का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार पंचायत स्तर पर जो टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है उसका सीधा असर आम घरों पर पड़ेगा। पंचायती राज टैक्स का नाम भले ही विकास के लिए लिया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि इसका बोझ गांव के हर घर को उठाना होगा। उन्होंने कहा कि जब पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज की मार झेल रहे लोगों पर नया टैक्स लगेगा तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह और मुश्किल हो जाएगा क्योंकि उनकी आमदनी सीमित है और खर्च लगातार बढ़ रहा है।

सुधाकर सिंह ने कहा कि सरकार को टैक्स लगाने से पहले इस बात पर सोचना चाहिए कि जनता की जेब पर कितना असर पड़ेगा। अगर विकास के नाम पर हर घर से पैसा लिया जाएगा तो लोग सवाल जरूर करेंगे कि बदले में उन्हें क्या मिल रहा है। सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं अगर दुरुस्त नहीं होंगी तो टैक्स का विरोध स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग मेहनती हैं, वे टैक्स देने से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। पारदर्शिता होनी चाहिए कि टैक्स का पैसा कहां खर्च हो रहा है और उसका लाभ आम आदमी तक पहुंच रहा है या नहीं। अंत में उन्होंने यही कहा कि बिहार को सिर्फ कर्ज और टैक्स के सहारे नहीं चलाया जा सकता। बिहार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उद्योग, कृषि और रोजगार पर काम करना पड़ेगा। जब तक बिहार अपने पैरों पर खड़ा नहीं होगा, तब तक हर नए टैक्स और हर नए कर्ज से आम आदमी की परेशानी बढ़ती रहेगी। लेकिन उन्हें भरोसा है कि बिहार के लोग अपनी मेहनत से एक दिन इस स्थिति को भी बदल देंगे, क्योंकि बिहार हार मानना नहीं जानता।

  

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