मुजफ्फरपुर में बाढ़ पूर्व तैयारी की समीक्षा, राहत शिविर से लेकर मेडिकल तक की व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश

मुजफ्फरपुर: जल संसाधन विभाग के सचिव -सह- जिला प्रभारी सचिव डॉ चंद्रशेखर सिंह की अध्यक्षता में बाढ़, सुखाड, एईएस/ जेई की समीक्षात्मक बैठक समाहरणालय सभागार में की गई। बैठक में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विभिन्न विभागों द्वारा की गई तैयारी तथा संचालित कार्य के बारे मे विस्तृत जानकारी दी। समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में बाढ़ आपदा से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में जिले में 26,125 पॉलिथीन शीट उपलब्ध हैं। इसके अलावा राहत एवं बचाव कार्य के लिए 15 सरकारी नाव तथा 263 निजी नाव चिन्हित की गई हैं। प्रशासन द्वारा राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई संचालन की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। जिले में कुल 418 राहत शिविर तथा 448 सामुदायिक रसोई केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जहां आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को भोजन एवं आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा।

बैठक में बताया गया कि जिले में एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा संचालित आपदा संपूर्ति पोर्टल पर अब तक 5 लाख 54 हजार 843 संभावित बाढ़ प्रभावित परिवारों की प्रविष्टि की जा चुकी है। इन सूचियों के सत्यापन एवं अद्यतन करने की प्रक्रिया जारी है ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत उपलब्ध कराई जा सके। बचाव एवं राहत उपकरणों की समीक्षा में बताया गया कि जिले में 06 इनफ्लैटेबल मोटर बोट, 65 टेंट, एक महाजाल, एक इनफ्लैटेबल लाइटिंग सिस्टम, 20 लाइफ बॉय रिंग, 65 लाइफ जैकेट, दो जीपीएस सेट, पांच सेटेलाइट फोन उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त 159 गोताखोर एवं 497 आपदा मित्रों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है, जिन्हें आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया जाएगा।

बैठक में कहा गया कि जिले में मुख्य रूप से बूढ़ी गंडक, गंडक एवं बागमती नदियों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके अलावा लखनदेई, करेह एवं बाया नदी के कारण भी कई क्षेत्रों में बाढ़ एवं जलजमाव की समस्या रहती है। तटबंधों एवं जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में कुल 147 स्लुइस गेट हैं और सभी सुरक्षित अवस्था में हैं। इनकी वार्षिक मरम्मती एवं ग्रिसिंग का कार्य कराया जा रहा है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया कि वे तटबंधों का नियमित निरीक्षण एवं निगरानी करें तथा जहां आवश्यकता हो वहां तत्काल सुरक्षा एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।

पशु संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले के पशु चिकित्सालयों में 44 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। जिले में कुल 38 पशु राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं, जहां आपदा की स्थिति में पशुओं के उपचार एवं देखभाल के लिए चिकित्सकों एवं कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था की गई है और पर्याप्त मात्रा मे पशु दवा भी उपलब्ध है। पेयजल व्यवस्था की समीक्षा में पाया गया कि मुजफ्फरपुर प्रमंडल अंतर्गत 2238 तथा मोतीपुर प्रमंडल अंतर्गत 3114 वार्ड नल-जल योजना से आच्छादित हैं। वहीं हैंडपंपों की स्थिति की समीक्षा में बताया गया कि मुजफ्फरपुर डिवीजन अंतर्गत कुल 21,914 हैंडपंपों में से 21,738 कार्यरत हैं, जबकि मोतीपुर डिवीजन में कुल 22,216 हैंडपंपों में से 21,964 कार्यरत हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मुजफ्फरपुर डिवीजन में 110 तथा मोतीपुर डिवीजन में 100 लक्ष्य के विरुद्ध 100 प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त की गई है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए मानव दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है तथा मेडिकल टीमों का गठन कर उन्हें आवश्यक संसाधनों से लैस किया गया है। इसके साथ ही बिजली विभाग, पथ निर्माण विभाग एवं ग्रामीण कार्य विभाग को भी सक्रिय एवं तत्पर होकर कार्य करने का निर्देश दिया गया ताकि आपदा के समय आवागमन एवं बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। जिले में एईएस/जेई (चमकी बुखार) की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। बैठक में सभी अधिकारियों को अलर्ट एवं केयरफुल रहने के साथ-साथ मिशन मोड में सक्रिय एवं तत्पर होकर कार्य करने का सख्त निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा ताकि एक भी बच्चा इस बीमारी की चपेट में न आए।

वाहन टैगिंग और एम्बुलेंस व्यवस्था सुदृढ़

मरीजों को त्वरित इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के सभी 373 पंचायतों में कुल 2575 वाहनों की प्रखंडवार/ पंचायतवार टैगिंग कर दी गई है ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर ही सरकारी खर्चे से निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक मरीज को त्वरित एवं सहज रूप में पहुंचाने की निशुल्क सुविधा उपलब्ध हो सके। इन वाहनों का भुगतान सरकारी दर के अनुसार दूरी के हिसाब से ₹400 से ₹1000 तक किया जाएगा। इसके अलावा जिले में वर्तमान में कुल 67 एम्बुलेंस कार्यरत हैं, जिन्हें पूरी तरह सक्रिय रखा गया है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रखंडवार और पंचायतवार टैग किए गए वाहनों की सूची संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल संपर्क कर मरीजों को बिना देर किये निकटतम अस्पताल पहुंचाया जा सके।

बच्चों पर विशेष निगरानी, घर-घर सर्वे

एईएस का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है, इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर 0 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की है। घर-घर सर्वे के माध्यम से पूरे जिले में इस आयु वर्ग के कुल 11,32,513 बच्चों का डेटा तैयार किया गया है। इनमें से 3051 बच्चों को चिन्हित कर विशेष निगरानी की जा रही है। प्रभारी सचिव ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि जिले से लेकर प्रखंड स्तर तक सभी स्वास्थ्य कर्मियों एवं संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण एवं क्षमता वर्धन सुनिश्चित किया जाए। जिले में अब तक 25,368 अधिकारियों एवं कर्मियों का प्रशिक्षण कराया जा चुका है। साथ ही सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पंचायत स्तर पर भी कर्मियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित करें और नियमित रूप से इसकी मॉनिटरिंग करें।

बैठक में एईएस के मामलों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अब तक कुल 35 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 20 मामले मुजफ्फरपुर जिले के हैं। अन्य मामलों में पूर्वी चंपारण के 4, सीतामढ़ी के दो, शिवहर के पांच, पश्चिम चंपारण के एक, सारण के एक, गोपालगंज के एक और समस्तीपुर के एक मामला शामिल है। राहत की बात यह है कि सभी मरीजों का समुचित इलाज किया गया और उन्हें स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। उन्होंने किसी भी नये मामले की सूचना तुरंत देने और मरीज को बिना देरी के उचित उपचार उपलब्ध कराने को कहा।

कंट्रोल रूम और त्वरित सहायता की सुदृढ़ व्यवस्था...

मरीजों और उनके परिजनों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। सदर अस्पताल, एसकेएमसीएच और आपातकालीन संचालन केंद्र में कंट्रोल रूम 24 घंटे क्रियाशील हैं। इसके साथ ही प्रत्येक प्रखंड में भी कंट्रोल रूम गठित किए गए हैं, ताकि जरूरतमंद लोगों को तुरंत सहायता मिल सके।

मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट

  

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