यहां सड़क पर सजती हैं दुकानें परिणाम हर दिन लगता है भीषण जाम, करीब आधा घंटा फंसी रही एंबुलेंस

कटिहार: बरारी हाट अब बाजार कम और जाम का अड्डा ज्यादा बनता जा रहा है। गंगा-दार्जिलिंग मुख्य सड़क पर रविवार को ऐसा जाम लगा कि वाहनों की लंबी कतार लग गई। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक एंबुलेंस करीब 25 मिनट तक जाम में फंसी रही। मरीज को लेकर जा रहे वाहन के इस तरह फंसने से व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरारी नगर पंचायत क्षेत्र के भगवती मंदिर के समीप हाट के दिनों में जाम की समस्या कोई नई नहीं है। रविवार और बृहस्पतिवार को लगने वाले हाट में सड़क के दोनों किनारों पर दुकानें सज जाती हैं। खरीदारी करने आने वाले लोग भी अपने वाहन सड़क पर ही खड़े कर देते हैं। इसके अलावा सड़क पर टोटो की बेतरतीब आवाजाही और ठहराव ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है।

सड़क पर दुकान, फिर किस बात की वसूली?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हाट लेसी द्वारा दुकानदारों से लेवी वसूली जाती है, तो दुकानदारों को व्यवस्थित जगह पर क्यों नहीं बैठाया जाता? यदि दुकानदारों से बाजार लगाने के एवज में शुल्क लिया जा रहा है, तो क्या उनकी बैठने की जगह निर्धारित करना और बाजार को व्यवस्थित रखना संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं है? स्थानीय लोगों का सवाल है कि सड़क पर दुकान लगवाकर लेवी वसूलना आखिर कहां तक उचित है? अगर सड़क ही बाजार बन जाएगी तो आम लोगों और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता कहां बचेगा?

जाम की जड़ सड़क पर अतिक्रमण!

बरारी हाट में जाम की सबसे बड़ी वजह सड़क पर लगने वाली दुकानें और बेतरतीब खड़े टोटो बताए जा रहे हैं। सब्जी और अन्य फुटकर दुकानों के सामने खरीदारी करने वाले लोग सड़क पर वाहन खड़ा कर देते हैं। धीरे-धीरे सड़क सिकुड़ती जाती है और कुछ ही देर में दोनों तरफ वाहनों की कतार लग जाती है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब इसी रास्ते से एंबुलेंस, दमकल या अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहन गुजरते हैं। रविवार को एंबुलेंस का 25 मिनट तक जाम में फंसा रहना व्यवस्था की इसी विफलता की तस्वीर पेश करता है।

मंदिर के आसपास भी बढ़ता अतिक्रमण

भगवती मंदिर और शिव मंदिर के आसपास भी दुकानों के फैलाव से अतिक्रमण बढ़ने की शिकायत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल के आसपास लगातार दुकानें फैलने से न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि मंदिर परिसर की सुंदरता और धार्मिक वातावरण पर भी असर पड़ रहा है।

जिम्मेदार कौन? किसके संरक्षण में चल रहा सड़क पर बाजार?

अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और नगर पंचायत की भूमिका को लेकर है। अगर सड़क पर दुकानें लग रही हैं, टोटो बेतरतीब खड़े हो रहे हैं और हाट के नाम पर लेवी भी वसूली जा रही है, तो इस पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर पंचायत से सड़क से अतिक्रमण हटाने, हाट के लिए व्यवस्थित स्थल निर्धारित करने, टोटो के ठहराव की जगह तय करने तथा रविवार और बृहस्पतिवार को विशेष यातायात व्यवस्था लागू करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल जाम लगने के बाद नहीं, बल्कि जाम की वजह बनने वाली व्यवस्था पर होनी चाहिए। वरना अगली बार जाम में एंबुलेंस कितनी देर फंसेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं होगा।

  

Related Articles

Post a comment