साइबर फ्रॉड की शातिर चाल, इस डीएम के नाम से बनाया फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट, अब...
- by Manjesh Kumar
- 20-May-2026
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मुजफ्फरपुर: एक तरफ सरकारी प्रशासनिक अधिकारी आम लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने की तरकीब बताते हुए किसी के झांसे में नहीं फंसने की अपील करते हैं तो दूसरी तरफ शातिर उन्हें भी अपने लपेटे में लेने से बाज नहीं आते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है मुजफ्फरपुर से जहां शातिरों ने डीएम के नाम से ही फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बना लिया। फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट में नाम और फोटो जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन का ही उपयोग किया गया है। मामला सामने आते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। अब पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार शातिरों ने एक नंबर से जिलाधिकारी के नाम का फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया। मामले में डीएम ने स्पष्ट किया कि इस अकाउंट का उनसे कोई संबंध नहीं है। मामले की सूचना पुलिस विभाग एवं साइबर सेल को दे दी गई है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। डीएम ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस प्रकार के फर्जी अकाउंट लोगों को भ्रमित करने के साथ-साथ साइबर ठगी, गलत सूचना फैलाने और निजी जानकारी हासिल करने का माध्यम बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अक्सर सरकारी अधिकारियों या प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नाम से अकाउंट बनाकर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं और बाद में आर्थिक सहायता, बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या अन्य गोपनीय सूचनाएं मांगते हैं।
डीएम ने लोगों से अपील की कि किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट की सत्यता की जांच किये बिना उस पर भरोसा न करें। यदि किसी संदिग्ध अकाउंट से पैसे की मांग की जाय या असामान्य संदेश प्राप्त हो तो तुरंत उसकी पुष्टि करें। किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक खाता विवरण, एटीएम पिन, पासवर्ड अथवा व्यक्तिगत दस्तावेज साझा नहीं करें। जिलाधिकारी ने आगाह करते हुए कहा कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी सोशल मीडिया मैसेंजर के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से पैसे की मांग नहीं करता है। जिलाधिकारी ने नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की सलाह देते हुए कई एहतियाती उपाय भी बताये हैं। लोगों से कहा कि वे केवल सत्यापित एवं आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट को ही फॉलो करें। किसी प्रोफाइल पर भरोसा करने से पहले उसकी पोस्ट, प्रोफाइल इतिहास, मित्र सूची तथा आधिकारिक लिंक की जांच अवश्य करें। यदि कोई अकाउंट नया हो या उसकी गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हों तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
डीएम ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, इसलिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बेहद आवश्यक हो गई है। विशेष रूप से युवाओं, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि साइबर अपराधी अक्सर इन्हीं वर्गों को निशाना बनाते हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त फर्जी ह्वाट्सएप अकाउंट या किसी अन्य संदिग्ध डिजिटल प्रोफाइल से संदेश प्राप्त होता है, तो उसकी स्क्रीनशॉट सहित सूचना तत्काल स्थानीय थाना, साइबर सेल या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें। साथ ही संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी ऐसे अकाउंट को रिपोर्ट करें, ताकि उसे जल्द बंद कराया जा सके। उन्होंने जिलावासियों से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। फर्जी अकाउंट और भ्रामक संदेशों को आगे बढ़ाने से बचें तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने पुनः स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी के नाम से संचालित उक्त ह्वाट्सएप अकाउंट पूरी तरह फर्जी है और आम नागरिक किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं।
मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट


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