Bihar: अपराधियों को सजा दिलाने की रफ्तार बढ़ी, 64,733 मामलों में 86,760 अभियुक्तों को सजा

पटना: राज्य भर में पारंपरिक अपराधों में बड़ी संख्या में कमी आई है। पिछले वर्ष की तुलना में हत्या के मामलों में 10.1 प्रतिशत, डकैती में 31.32 प्रतिशत और दंगा में 18.97 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ऐसे सभी अपराधों में बड़ी संख्या में कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी गृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने सूचना भवन के सभागार में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक उन्माद से जुड़े मामलों में खुफिया जानकारी एकत्र करने से लेकर सूचना संग्रह कर त्वरित कार्रवाई करने की वजह से सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं में काफी कमी आई है। 2025-26 में संप्रदायिक घटनाओं से संबंधित 263 मामले में अभियोजन की स्वीकृति दी गई और सभी जिलों को आरोप-पत्र समर्पित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।

सचिव ने कहा कि राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों के कारण वर्तमान में सभी जिले नक्सल मुक्त हो चुके हैं। कोई जिला नक्सलवाद से प्रभावित नहीं रहा, जबकि 2013 में 22 जिले नक्सल से प्रभावित हुआ करते थे। हालांकि केंद्र सरकार ने चार जिलों औरंगाबाद, गयाजी, जमुई और लखीसराय को लीगेसी एवं थ्रस्ट जिलों के तौर पर चिन्हित करके रखा है। नक्सलवाद से मुक्त हुए सभी जिलों में इसकी पुनर्रावृति नहीं हो, इसके लिए सभी विकासात्मक कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। इस वर्ष अब तक नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की कोई घटना नहीं हुई है। अब तक 58 नक्सलियों की गिरफ्तारी की गई है।

सचिव ने कहा कि अपराधियों की गिरफ्तारी और सजा दिलाने की कार्रवाई निरंतर जारी है। इस वर्ष मई में 64 हजार 733 कांडों में सजा सुनाई गई, जिसमें 86 हजार 760 अभियुक्तों को सजा मिली। इसमें दो को मृत्युदंड, 553 को आजीवन कारावास, 297 को 10 वर्ष से अधिक की सजा तथा 794 को 10 वर्ष से कम एवं 2 वर्ष से अधिक की सजा सुनाई गई है। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष दोषियों को सजा दिलाने की दर में 25-30 फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है।

इस दौरान डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि राज्य भर में 90 के दशक में सालाना 6 से साढ़े 6 हजार हत्याएं होती थी, जो अभी घटकर 2 हजार से 2400 तक पहुंच गई हैं। इसकी मुख्य वजह प्रेम प्रसंग, जमीन विवाद और व्यवसायिक विवाद हैं। अपराधियों पर लगातार नकेल कसी जा रही है। इस वर्ष जून तक 2 लाख से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पिछले वर्ष 3.85 लाख को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस दीदी को जल्द ही 1500 स्कूटी मिलने जा रही है। आगामी दो से तीन महीने में पुलिसकर्मियों को 3100 मोटरसाइकिल भी मुहैया करा दी जाएगी। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रपति के स्तर से दिए जाने वाले तीन तरह के विशेष पदकों वीरता पदक, अतिविशिष्ट सेवा पदक और सराहनीय सेवा पदक में बिहार के 18 पुलिस कर्मियों को प्रदान किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा संख्या सिपाही एवं हवलदार रैंक के कर्मी की है। एक इंस्पेक्टर रैंक के पदाधिकारी को वीरता पदक मिला है। इसके अलावा 15 अगस्त को राज्य स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में 7 पुलिसवालों को 51 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में जल्द ही पुलिसिंग में रेंज की व्यवस्था को हटाकर पहले की तरह जोनल व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि समुचित तरीके से पुलिसिंग की जा सके।

डीजीपी ने साइबर अपराध को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि बिहार उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हैं, जहां सभी जिलों में साइबर थाना कार्यरत है। सालाना औसतन 7 हजार से अधिक एफआईआर दर्ज हो रही है। वहीं ठगी गई कुल राशि का 16 फीसदी रिकवरी करके पीड़ितों को लौटाए जा रहे हैं। इसमें बिहार देश के अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे साइबर प्रहार अभियान के तहत इस वर्ष जुलाई तक 193 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस वर्ष राज्य के साइबर थानों में अब तक 2942 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 522 अपराधियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार, गृह के विशेष सचिव क्षत्रनिल सिंह और एडीजी (विधि-व्यवस्था) के सुहिता अनुपम भी मौजूद थी।

डीजीपी ने कहा कि राज्य में पुलिसबल की संख्या बढ़कर 1 लाख 21 हजार हो गई है। आने वाले समय में इसमें और इजाफा होगा। 19 हजार 800 सिपाहियों ने योगदान किया है, जिनका प्रशिक्षण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष अब तक 22 हजार से अधिक सिपाहियों की नियुक्ति की जा चुकी है। अभी 4630 चालक सिपाही समेत 26 हजार के नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। पिछले डेढ़ वर्ष में 50 हजार से अधिक सिपाही की नियुक्ति हो चुकी है, जो कुल पुलिस बल का 40 फीसदी है।
  

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