स्कूल फीस की मनमानी वृद्धि किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं : आयुक्त
- by Manjesh Kumar
- 16-May-2026
- Views
तिरहुत प्रमंडल में 3212 निजी विद्यालयों की जांच, 310 स्कूलों को नोटिस
मुजफ्फरपुर : तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत निजी विद्यालयों में मनमाने ढंग से फीस वृद्धि एवं अन्य शुल्कों की वसूली पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2019 के प्रावधानों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से आयुक्त कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना में पारदर्शिता लाना तथा अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ को नियंत्रित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
प्रमंडलीय आयुक्त ने बताया कि विभिन्न मीडिया माध्यमों, जन संवाद कार्यक्रमों तथा अभिभावकों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर यह जानकारी सामने आई थी कि कई निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने तरीके से फीस में वृद्धि की जा रही है। इसके अतिरिक्त विद्यालयों में पुस्तक, ड्रेस एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य किया जा रहा है तथा परिवहन शुल्क में भी अनियंत्रित वृद्धि की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ लेते हुए सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई.
आयुक्त ने बताया कि बैठक में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को अपने-अपने जिलों के निजी विद्यालयों का निरीक्षण करने तथा निर्धारित प्रपत्र में विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। निरीक्षण के दौरान वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 की फीस संरचना, दोनों वर्षों के शुल्क में अंतर, पुस्तक एवं ड्रेस की कीमतों में वृद्धि, किसी एक दुकान से सामग्री खरीदने की बाध्यता तथा परिवहन शुल्क सहित अन्य मदों की विस्तृत जांच की गई.
इस दौरान तिरहुत प्रमंडल अंतर्गत कुल 3212 निजी विद्यालयों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 310 विद्यालयों को बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2019 के उल्लंघन का दोषी पाते हुए नोटिस जारी किया गया । इनमें पश्चिम चंपारण जिले के सर्वाधिक 72 विद्यालय शामिल हैं, जिनकी सुनवाई शुक्रवार को आयुक्त कार्यालय में की गई।
सुनवाई के दौरान संबंधित विद्यालयों के प्राचार्य/ निदेशक अथवा उनके प्रतिनिधि उपस्थित हुए। आयुक्त ने बताया कि अधिकांश विद्यालयों ने लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए यह स्वीकार किया कि फीस में वृद्धि की गई थी। साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कई विद्यालयों ने बढ़ाई गई फीस को वापस कम कर दिया है तथा बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2019 के अनुरूप संशोधित शुल्क संरचना को विद्यालय के सूचना पट्ट एवं वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है, ताकि अभिभावकों के बीच किसी प्रकार की भ्रम एवं संशय की स्थिति उत्पन्न न हो और व्यवस्था पूर्णतः पारदर्शी बनी रहे.
प्रमंडलीय आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जिन विद्यालयों ने निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूला है, वे अभिभावकों से ली गई अतिरिक्त राशि को वापस करें अथवा आगामी माह की फीस में समायोजित करें। उन्होंने कहा कि विद्यालय शिक्षा का केंद्र है और इसे व्यवसायिक संस्थान के रूप में संचालित करने की अनुमति किसी भी परिस्थिति में नहीं दी जा सकती। बच्चों एवं अभिभावकों का विश्वास एवं भरोसा बनाये रखना सभी निजी विद्यालयों की नैतिक एवं कानूनी जिम्मेदारी है।
आयुक्त ने यह भी बताया कि पश्चिम चंपारण जिले के पांच विद्यालय ऐसे पाए गए, जिन्होंने न तो सुनवाई में भाग लिया और न ही किसी प्रकार का लिखित जवाब प्रस्तुत किया। ऐसे विद्यालयों की मनमानी पर रोक लगाने तथा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2019 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। साथ ही इन विद्यालयों को अगली निर्धारित सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है.
जिन विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है उनमें संत करेंस विद्यालय बेतिया, संत थॉमस स्कूल चनपटिया , सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल नौतन सहित अन्य विद्यालय शामिल हैं.
प्रमंडलीय आयुक्त ने पश्चिम चंपारण के जिला पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा किये गये कार्य की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों एवं अभिभावकों के हितों की रक्षा हेतु सरकार के निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य निजी विद्यालयों के संचालन में पारदर्शिता स्थापित करना तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी एवं संवेदनशील बनाना है.
प्रेस वार्ता के दौरान आयुक्त ने बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2019 तथा अन्य संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका पालन सभी निजी विद्यालयों को अनिवार्य रूप से करना है। उन्होंने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को नियमित निरीक्षण जारी रखने, अभिभावकों की शिकायतों का त्वरित निष्पादन करने तथा अधिनियम के उल्लंघन की स्थिति में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
आयुक्त ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निजी विद्यालयों को यह समझना होगा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, न कि लाभ अर्जित करने का साधन। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि यदि किसी विद्यालय द्वारा अधिनियम के विपरीत शुल्क वसूला जाता है अथवा किसी प्रकार की अनियमितता की जाती है तो उसकी सूचना संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी अथवा प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके.
प्रमंडलीय आयुक्त ने बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2019 एवं अन्य प्रावधानों का उल्लेख करते हुए निजी विद्यालयों को निम्न निर्देश का अनुपालन करने को कहा-
1- निजी विद्यालयों को सभी प्रकार के शुल्कों का विवरण विद्यालय के सूचना पट्ट एवं वेबसाइट पर सार्वजनिक प्रकाशित करना अनिवार्य है.
2- विद्यालय समानता उक्त शुल्क में विधि नहीं करेंगे यदि शुल्क वृद्धि अनिवार्य हो तो सुसंगत प्रावधानों में निहित सीमा एवं विहित प्रक्रिया का अनुपालन कर ही शुल्क वृद्धि कर सकते हैं.
3- निजी विद्यालयों द्वारा पुनर्नामांकन शुल्क एवं अन्य प्रतिबंधित शुल्क नहीं लिया जाएगा.
4- विद्यालयों को पुस्तकों एवं पठन-पाठन सामग्री के साथ अन्य आवश्यक सामग्रियों की सूची सूचना पत्र एवं वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी है.
5- अभिभावक अपनी सुविधा अनुसार किसी भी दुकान या विक्रेता से पुस्तक एवं पठन-पाठन सामग्री तथा अन्य सामग्री खरीद सकते हैं। संबंधित विद्यालय किसी निर्दिष्ट दुकान अथवा निर्दिष्ट ब्रांड का सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है.
6 - विद्यालय पाठ्य पुस्तक एवं यूनिफॉर्म का पैटर्न बार-बार नहीं बदलेंगे.
7- विद्यालय या सुनिश्चित करेगा कि अभिभावकों या विद्यार्थियों पर निर्धारित पाठ्यक्रम से अतिरिक्त अध्ययन सामग्री खरीदने हेतु कोई अनावश्यक दबाव न डाला जाए.
8/किसी भी छात्र-छात्रा को शुल्क बकाया रहने की स्थिति में कक्षा, परीक्षा अथवा परिणाम से वंचित नहीं किया जाएगा जब तक कि प्रचलित नियमों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण न की गई हो.
इस प्रकार प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन निजी विद्यालयों में बढ़ते फीस पर लगाम लगाने, अभिभावकों बच्चों को आर्थिक बोझ से राहत दिलाने तथा निजी विद्यालय के संचालन हेतु सरकार का शुल्क विनियमन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में सार्थक एवं प्रभावी प्रयास है.
मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट.....


Post a comment