विभिन्न नदियों में बढ़ा जलस्तर तो बेहाल हुआ बिहार, लोगों की मदद की कोशिश में जुटी है सरकार, सीएम सम्राट ने प्रभारी मंत्री को दिया बड़ा टास्क
- by Manjesh Kumar
- 05-Sep-2026
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पटना: बिहार में गंगाजी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किया है। ताकि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की कमी नहीं हो। इन निर्देशों के अनुसार, गंगा नदी के तट पर स्थित बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार समेत 13 जिलों के प्रभारी मंत्री एवं प्रभारी सचिव तत्काल प्रभाव से संबंधित जिलों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग करेंगे। सभी मंत्री और अधिकारी इन प्रभावित क्षेत्रों में कैंप कर जरुरतमंदों तक त्वरित सहायता पहुंच सके। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विशेष रूप से राजधानी पटना में गंगाजी के घाटों के तेजी से बढ़ते जलस्तर को देखते हुए यहां शहरी सुरक्षा तटबंध के आसपास के इलाकों पर कड़ी नजर रखने के लिए पटना नगर निगम, जिला प्रशासन (पटना) और जल संसाधन विभाग को 24x7 अलर्ट मोड पर रहने और विशेष तौर पर निगरानी बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति पर राज्य सरकार निरंतर नजर बनाए हुए है।
आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद
इधर, बाढ़ की संभावित स्थिति को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद है। विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत व बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। विभाग की मानें तो राज्य के 11 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल के कुल 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में लगभग 10.26 लाख (10,25,745) की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। आपदा से निपटने और लोगों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से युद्ध स्तर पर कदम उठाए गए हैं। बाढ़ पीड़ितों को सुलभ स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित आवागमन प्रदान करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 50 चिकित्सा शिविर, 19 वोट एम्बुलेंस और 36 पशु चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं। विस्थापित और प्रभावित आबादी की निकासी एवं आवागमन को सुगम बनाने के लिए कुल 858 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के बीच अब तक लगभग 12,314 पॉलीथीन शीट और 2,228 ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया जा चुका है।
38 सामुदायिक रसोई का हो रहा संचालन
बाढ़ प्रभावित लोगों को साफ और ताजा भोजन उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न जिलों में कुल 38 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इनमें अब तक लगभग 1.21 लाख (1,20,877) लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त वैशाली जिले में 1 राहत शिविर भी संचालित किया जा रहा है, जहां लगभग 326 बाढ़ पीड़ित शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा इत्यादि की मुकम्मल व्यवस्था की गई है।
एसटीआरएफ और एनडीआरएफ की तैनाती
संभावित खतरों से निपटने और त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए राज्य में एनडीआरएफ (एनडीआरएफ) की 07 और एसडीआरएफ (एसडीआरएफ) की 27 टीमों को विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है। केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त सूचना के अनुसार, पटना के गांधीघाट और पंडारक में गंगा नदी का जलस्तर पिछले सर्वोच्च जलस्तर (एचएफएल) से ऊपर बह रहा है, जबकि गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा नदी विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर हैं। वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 1.26 लाख क्यूसेक, बीरपुर बराज पर कोसी का जलस्राव 1.77 लाख क्यूसेक और इन्द्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 3.48 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया है। बिहार मौसम सेवा केंद्र की ओर से अगले 2 दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम एवं कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताए जाने के मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग पूरी स्थिति पर लगातार और सूक्ष्म निगरानी रखे हुए है।


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