राजकीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा मंत्री ने की खास अपील, कहा 'पढ़ाने के साथ ही आप करते हैं चरित्र निर्माण'

पटना: शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य के शिक्षकों से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही बिहार के स्वर्णिम भविष्य के निर्माता हैं। उनके भीतर देश का सर्वोच्च पद हासिल करने का माद्दा है। शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथ उनके व्यक्तित्व और चरित्र का भी निर्माण करते हैं। शिक्षकों का सबसे महत्वपूर्ण कर्मक्षेत्र उनका विद्यालय है। अब उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पटना आकर धरना-प्रदर्शन करने की नौबत नहीं आएगी। आज बिहार की शिक्षा विद्या ददाति विनयम् के साथ बढ़ रही है।

शिक्षक दिवस पर शनिवार को पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिहार के शिक्षकों की समस्याओं का समाधान जितनी तेजी से संभव हो, किया जाए। शिक्षा विभाग पूरी तत्परता और प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में काम कर रहा है। करीब 5 लाख 80 हजार शिक्षक राज्य के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जब कोई बच्चा अपनी मां के आंचल से निकलकर विद्यालय पहुंचता है, तभी शिक्षक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शुरू हो जाती है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों में ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संस्कार, जिम्मेदारी की भावना और एक अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा भी दें। यदि हमें समृद्ध बिहार और विकसित भारत का निर्माण करना है, तो छात्र-छात्राओं को स्वामी विवेकानंद जैसी शक्ति, ज्ञान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देनी होगी।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार की पहचान प्राचीन काल से ही ज्ञान और शिक्षा के केंद्र के रूप में रही है। शिक्षकों के प्रयास से बिहार को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। मिथिलेश तिवारी ने शिक्षक दिवस पर राज्य के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षक जिस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर लेकर चल रहे हैं, उसे वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएं। बिहार फिर से ज्ञान का केंद्र बने, यही उनकी कामना है।

समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री शीला कुमारी समेत सभी अतिथियों ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित करने के बाद दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री समेत सभी अतिथियों का अंगवस्त्र, मोमेंटो और पौधा देकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने 37 शिक्षकों को उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, शिक्षा विभाग के विशेष सचिव धर्मेन्द्र कुमार, प्राथमिक शिक्षा निदेशक निशांत कुमार विवेक, माध्यमिक शिक्षा निदेशक नितिन कुमार सिंह, एससीईआरटी के निदेशक यतेंद्र कुमार पाल, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष त्यागराजन एसएम समेत सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

  

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