फरक्का जल संधि पर जदयू का प्रहार: बिहार का पानी लूटकर बांग्लादेश को देने का आरोप, विधायक बोले- अब बिहार की हकमारी बर्दाश्त नहीं
- by Manjesh Kumar
- 11-Sep-2026
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शेखपुरा: फरक्का जल संधि को लेकर जदयू ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। जिला जदयू कार्यालय में शुक्रवार को बरबीघा जदयू विधायक कुमार पुष्पनंजय ने प्रेसवार्ता कर केंद्र और पूर्व की सरकारों पर बिहार के हितों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में भारत-बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि का सबसे बड़ा बोझ बिहार उठा रहा है और अब बिहार के हक के साथ खिलवाड़ नहीं चलने दिया जाएगा। विधायक ने कहा कि “फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद” के जरिए जदयू इस मुद्दे को गांव-गांव और जनता के बीच ले जाएगी।
पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों—बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार में संवाद कर रहे हैं। जदयू का आरोप है कि फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद बढ़ने से उत्तर बिहार की बाढ़ की समस्या गंभीर हुई है। वहीं शुष्क मौसम में पानी के बंटवारे का असर बिहार की नदियों, किसानों की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है। पार्टी का दावा है कि इस अंतरराष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है। विधायक ने कहा कि जिन लोगों ने इस व्यवस्था को स्वीकार किया, उन्होंने बिहार के किसानों, मजदूरों, उद्योगों और आने वाली पीढ़ियों के हितों की चिंता नहीं की। >
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि बिहार को अब केवल आश्वासन नहीं, अपने पानी पर अपना अधिकार चाहिए।फरक्का जल संधि का भविष्य तय करते समय वर्ष 2050 तक बिहार की जल जरूरतों को प्राथमिकता देनी होगी। जदयू इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श में और मजबूती से उठाकर केंद्र सरकार से संधि पर पुनर्विचार की मांग करेगी।


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