मुजफ्फरपुर की विधवा महिला के लिए फरिश्ता बना अधिवक्ता, दिलाए हक के 21 लाख, बदले में मांगा सिर्फ...

मुजफ्फरपुर की विधवा महिला के लिए फरिश्ता बना अधिवक्ता, दिलाए हक के 21 लाख, बदले में मांगा सिर्फ...

मुजफ्फरपुर: जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के बेरुआ गाँव निवासी अमरीका देवी अपने पति की मृत्यु के बाद अपने पति के द्वारा जमा किये गये पैसे के लिए दर-दर की ठोकर खा रही थी, लेकिन उनकी समस्या के निवारण के लिए कही से कोई पहल नहीं हो रही थी। पिछले वर्ष महिला ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस के झा से संपर्क कर अपनी समस्या बताई। अधिवक्ता एस के झा ने उनकी बातों को समझ अपने स्तर से पहल करना शुरू किया। वृद्ध महिला ने ज़ब अधिवक्ता को फीस के संबंध में पूछा तो अधिवक्ता ने बताया कि ज़ब उनका काम हो जायेगा तो कोर्ट में आकर आशीर्वाद देना होगा। उसके बाद वह कानूनी लड़ाई में लग गए और अमरीका देवी को कूल 21 लाख रूपये मिल गये। विदित हो कि अमरीका देवी के पति बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत थे, उनकी मृत्यु के पश्चात् वृद्ध महिला काफ़ी अकेला हो गयी थी।

महिला ने बताया कि उनके तीन पुत्र थे, जिसमें से एक पुत्र की मृत्यु हो चुकी है। अन्य दोनों पुत्र हमेशा इनके साथ मारपीट करते हैं और संपत्ति के लिए वृद्ध महिला को उनके काफ़ी परेशान करते हैं। वृद्ध महिला के पति ने महिला के लिए कुछ राशि संचित करके रखे थे लेकिन इनके पुत्रों के गलत रवैये के वजह से कानूनी अड़चने सामने आ गयी थी जिससे महिला काफ़ी परेशान थी। मानवाधिकार अधिवक्ता एस के झा ने समस्या का निवारण कर दिया। बताते दें कि पैसा मिलने के बाद वृद्ध महिला ने कोर्ट में पहुँचकर मानवाधिकार अधिवक्ता एस के झा को खूब आशीर्वाद दिया।

वरीय अधिवक्ता विजय कुमार शाही ने कहा कि मानवाधिकार अधिवक्ता एस के झा के पास प्रतिदिन पूरे राज्य भर से दर्जनों लोग अपने मुकदमें को लेकर आते हैं और उनसे सलाह लेते हैं। इतना ही नहीं, गरीबों को न्याय मिले इसके लिए वे देश के अलग-अलग राज्यों की अदालतों में भी जाकर कानूनी लड़ाई लड़ते हैं और लोगों को इंसाफ दिलाते हैं। मानवाधिकार अधिवक्ता एस के झा ने बताया कि जहां तक संभव हो सकता है, हमारी कोशिश रहती है कि सबको न्याय मिल सके। वही वृद्ध विधवा महिला अमरीका देवी की बातों और उनके संघर्ष को सुनकर उपस्थित लोग भी काफ़ी भावुक हो गये। वृद्ध महिला ने बताया कि आज अगर हम जिंदा हैं तो इसका पूरा श्रेय मानवाधिकार अधिवक्ता एस के झा को जाता हैं क्योंकि आज हम इनके बदौलत ही जीवित हैं।

मुजफ्फरपुर से रूपेश कुमार की रिपोर्ट
  

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