बाढ़ की स्थिति को लेकर राज्य सरकार है सतर्क, मुख्य सचिव ने प्रभावित जिला के अधिकारियों से ली जानकारी, दिए निर्देश

पटना: बुधवार को आपदा प्रबंधन विभाग में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में राज्य के बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सुपौल एवं सहरसा के जिला पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल भी उपस्थित रहे।  बैठक के दौरान संबंधित जिलों में बाढ़ की वर्तमान स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य, तटबंधों की स्थिति, बाढ़ राहत शिविरों का संचालन, सामुदायिक रसोई, नावों के परिचालन तथा राहत सामग्री के वितरण की विस्तृत समीक्षा की गई।जिला पदाधिकारियों द्वारा अपने-अपने जिलों में बाढ़ की स्थिति एवं प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों की अद्यतन जानकारी मुख्य सचिव को दी गई।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन पूरी संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने विशेष रूप से तटबंधों की निरंतर निगरानी करने तथा संवेदनशील स्थलों पर आवश्यक सतर्कता बरतने का निर्देश दिया, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

9 अक्टूबर को जीआर राशि का अंतरण

बैठक में बाढ़ प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली जीआर की राशि के वितरण की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में उपस्थित जिला पदाधिकारियों को बताया गया कि माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा डीबीटी के माध्यम से 9 अक्टूबर को जीआर की राशि का अंतरण किया जाएगा। इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने तथा पात्र लाभुकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई के अधिक से अधिक संचालन पर विशेष जोर

बैठक में बाढ़ राहत शिविरों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में 06 राहत शिविर का भी संचालन किया जा रहा है, जहां 3550 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन, चिकित्सा आदि की व्यवस्था की गई है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन, पेयजल, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएं। सामुदायिक रसोई का संचालन सुचारू रूप से सुनिश्चित करने तथा जरूरतमंद लोगों को समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कुल 100 सामुदायिक रसोई केंद्र के माध्यम से अबतक 1.40 लाख लोगों को भोजन कराया गया है। मुख्य सचिव द्वारा इस संख्या को अधिक से अधिक बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

नावों के परिचालन एवं ड्राइ राशन पैकेट की समीक्षा

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन एवं राहत कार्यों के लिए नावों के परिचालन की भी समीक्षा की गई। आबादी निष्क्रमण एवं आवागमन को सुगम बनाने हेतु कुल 221 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आवश्यकता वाले क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नावों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रभावित लोगों को आवागमन में कठिनाई न हो तथा राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। इसके साथ ही पॉलीथिन शीट, ड्राई राशन पैकेट एवं पशुचारा के वितरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत एवं बचाव कार्य हेतु 2400 से अधिक ड्राइ राशन पैकेट तथा 10400 पॉलीथिन शीट का वितरण किया गया है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों एवं पशुपालकों की आवश्यकता के अनुरूप राहत सामग्री एवं पशुचारा का वितरण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जिला पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखें तथा जिला स्तर पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करें। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए आवश्यकता के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जा रही सभी आवश्यक सेवाओं की सतत निगरानी बनाए रखें।

  

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